उत्तराखंड

उत्तराखंड गौरव रत्न अवार्ड के लिए नामित हुए प्रोफेसर डॉ. अमित कुमार जायसवाल, शिक्षा एवं समाजसेवा में 24 वर्षों का उल्लेखनीय योगदान

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चमोली –

गोपेश्वर (चमोली)। शिक्षा, शोध, साहित्य, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर गोपेश्वर के प्रोफेसर एवं शिक्षा संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ. अमित कुमार जायसवाल को उत्तराखंड गौरव रत्न अवार्ड के लिए नामित किया गया है। विगत 24 वर्षों से अध्यापन एवं शोध के क्षेत्र में सक्रिय डॉ. जायसवाल ने अपने शैक्षणिक नवाचारों, शोध कार्यों और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान बनाई है।

डॉ. जायसवाल की शैक्षणिक योग्यता में हिंदी एवं संस्कृत विषयों में एम.ए., एम.एड., यूजीसी नेट तथा शिक्षा विषय में पीएच.डी. शामिल हैं। वर्तमान में वे श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर गोपेश्वर में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त वे मुख्य कुलानुशासक तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) अध्ययन केंद्र गोपेश्वर के समन्वयक के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान केवल अध्यापन तक सीमित नहीं रहा है। कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने डिजिटल शिक्षण सामग्री एवं नवाचारी शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से विद्यार्थियों की पढ़ाई निरंतर जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार में मेंटल हेल्पलाइन कोऑर्डिनेटर के रूप में विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को ऑनलाइन काउंसलिंग प्रदान की। वहीं जिला प्रशासन द्वारा स्थापित क्वारंटाइन सेंटर के नोडल अधिकारी के रूप में प्रवासियों के आवास, भोजन एवं उपचार की व्यवस्थाओं में सहयोग किया।

गोपेश्वर परिसर में उनके द्वारा प्रारंभ की गई गौरा देवी स्मृति व्याख्यानमाला पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने गौरा वाहिनी एवं पर्यावरण प्रहरी के रूप में लगभग 200 स्वयंसेवकों को तैयार किया। उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा, हिमालयी पर्यावरण एवं जैव विविधता के संरक्षण से जुड़े विषयों को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने के लिए मॉरीशस एवं पुर्तगाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में भी सहभागिता की।

विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए उन्होंने कैरियर गाइडेंस, काउंसलिंग एवं रोजगारपरक गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया। प्लेसमेंट सेल के संयोजक के रूप में 100 से अधिक छात्र-छात्राओं का विभिन्न बैंकों में चयन कराने में योगदान दिया। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ विभिन्न संगठनों के माध्यम से भी सहयोग उपलब्ध कराया।

शोध एवं अकादमिक क्षेत्र में भी डॉ. जायसवाल की उपलब्धियां उल्लेखनीय हैं। उनकी छह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं तथा 30 से अधिक शोधपत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। वे 100 से अधिक शोधपत्र विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में प्रस्तुत कर चुके हैं। वर्तमान में उनके निर्देशन में पांच शोधार्थी शोध कार्य कर रहे हैं। विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों की बोर्ड ऑफ स्टडीज समितियों में सदस्य के रूप में पाठ्यक्रम निर्माण में भी उन्होंने योगदान दिया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के सहयोग से आठ दिवसीय राष्ट्रीय ओरिएंटेशन एवं संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किया। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के उल्लास कार्यक्रम में भी एससीईआरटी उत्तराखंड के माध्यम से सहभागिता की। इसके अतिरिक्त सीटीई गढ़वाल के समन्वयक के रूप में माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों एवं प्रवक्ताओं के कौशल विकास हेतु सात प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए।

उत्तराखंड की संस्कृति, साहित्य, अध्यात्म एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में भी वे निरंतर सक्रिय हैं। 25 नवंबर 2025 को भारतीय भाषा समिति, भारत सरकार के सहयोग से गोपेश्वर परिसर में राष्ट्रीय संगोष्ठी तथा 26 एवं 27 नवंबर 2025 को ‘इंडिजिनियस नॉलेज एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है। पद्मश्री डॉ. कल्याण सिंह रावत की संस्था मैती के साथ मिलकर भी वे शिक्षा, संस्कृति एवं सामाजिक क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं।

उनके शैक्षणिक एवं शोधपरक योगदान के लिए प्रदेश सरकार द्वारा उत्कृष्ट शिक्षक पुरस्कार सहित विभिन्न संस्थानों से सम्मान प्राप्त हुए हैं। इनमें जिला एवं सत्र न्यायालय चमोली का शिक्षक गौरव पुरस्कार, डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा का यंग रिसर्चर अवार्ड, देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार का बेस्ट रिसर्च पेपर अवार्ड, विश्व हिंदी सचिवालय मॉरीशस का हिंदी रत्न गौरव पुरस्कार, अभ्युदय श्री पुरस्कार, राधाकृष्णन टीचर्स सम्मान तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय एलुमनी एसोसिएशन का विश्वविद्यालय गौरव पुरस्कार प्रमुख हैं।

डॉ. अमित कुमार जायसवाल का 24 वर्षों का शैक्षणिक अनुभव, शोध कार्य, विद्यार्थी कल्याण, पर्यावरण संरक्षण एवं उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन के प्रति समर्पण उन्हें एक विशिष्ट शिक्षाविद् के रूप में स्थापित करता है। उत्तराखंड गौरव रत्न अवार्ड के लिए उनका नामांकन प्रदेश के शैक्षणिक एवं सामाजिक क्षेत्र में उनके योगदान की महत्वपूर्ण पहचान माना जा रहा है।

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