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शंकराचार्य के अपमान पर गरमाई प्रदेश की राजनीति, श्रीनगर में कांग्रेस का मौनव्रत

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श्रीनगर गढ़वाल –

उत्तर प्रदेश में ज्योतिर्मठ पीठ के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस घटना के विरोध में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने श्रीनगर स्थित हनुमान मंदिर परिसर में कुछ देर के लिए मौनव्रत रखकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

मौनव्रत के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ-साथ स्थानीय नागरिक भी शांति पूर्वक शामिल हुए। इस अवसर पर गणेश गोदियाल ने कहा कि शंकराचार्य किसी एक संप्रदाय या वर्ग के नहीं, बल्कि पूरे सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरुओं में से एक हैं। उनके साथ हुआ दुर्व्यवहार केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, भारतीय परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं का अपमान है।

गोदियाल ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के संरक्षण में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, “जो पार्टी खुद को धर्म और संस्कृति का ठेकेदार बताती है, उसी के शासन में धर्मगुरुओं की गरिमा सुरक्षित नहीं है। यह घटना भाजपा सरकार की असंवेदनशीलता, अहंकार और दोहरे चरित्र को उजागर करती है।”कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की, ताकि भविष्य में किसी भी धर्मगुरु के सम्मान के साथ खिलवाड़ न हो सके। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जगतगुरु के अपमान को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मौनव्रत के माध्यम से कांग्रेस ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि धर्म और संस्कृति के प्रश्न पर राजनीति से ऊपर उठकर समाज को एकजुट होना चाहिए। गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी सम्मान, मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए हर उस आवाज़ के साथ खड़ी रहेगी, जो अन्याय के खिलाफ उठती है।

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