
-बसंत पंचमी पर हिमालय को मिला बारिश-बर्फ का वरदान
चमोली –
बसंत पंचमी का पावन पर्व इस बार उत्तराखण्ड के हिमालयी अंचल के लिए सुखद सौगात बनकर आया। महीनों से सूखे की मार झेल रहे पहाड़ों पर आखिरकार प्रकृति मेहरबान हुई और बदरीनाथ, हेमकुंड, रुद्रनाथ,वैदनी, लोहजंग, वाण, थराली के पार्था सहित ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्का हिमपात शुरू हो गया, जबकि घाटी क्षेत्रों में बूंदाबांदी ने खेत-खलिहानों में नई उम्मीद जगा दी।
दरअसल, बीते चार महीनों से पूरा मध्य हिमालय सूखे की चपेट में था। अक्टूबर 2025 से एक बूंद वर्षा नहीं हुई थी। सामान्यतः दिसंबर से शुरू होने वाला हिमपात भी इस बार गायब रहा। जनवरी बीतने को थी, लेकिन पहाड़ों पर बर्फ का नामोनिशान नहीं था। इससे खेती, पेयजल और पर्यावरण पर संकट गहराने लगा था।
नन्दादेवी की हिमालयी यात्रा के अंतिम गाँव वाण के निवासी हीरा सिंह बिष्ट बताते हैं कि बारिश की आस में ग्रामीणों की आंखें नम हो गई थीं। उन्होंने माँ नन्दादेवी और लाटू देवता से प्रार्थना की थी। अब बसंत पंचमी के दिन पहाड़ियों पर बर्फ गिरती देख लोगों के चेहरों पर फिर मुस्कान लौट आई है।शुक्रवार को बदरीनाथ धाम की ऊंची चोटियों, नर-नारायण पर्वत और नीलकंठ पर हिमपात दर्ज किया गया। बसंत पंचमी पर प्रकृति का यह वरदान आस्था और विज्ञान—दोनों के लिए उम्मीद की किरण बनकर आया है। पहाड़ों में अब फिर से जीवन, हरियाली और खुशहाली की आस जाग उठी है।


