उत्तराखंड

न्यायालय जाने से पहले अपनाएं स्थायी लोक अदालत का विकल्प

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जन-उपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों का आसान समाधान, स्थायी लोक अदालत से मिलेगा त्वरित न्याय*

चमोली –

जन-उपयोगी सेवाओं से संबंधित विवादों के त्वरित, सुलभ एवं प्रभावी निस्तारण के उद्देश्य से राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 22(बी) के अंतर्गत पौड़ी गढ़वाल में स्थायी लोक अदालत की स्थापना की गई है। इसके अधिकार क्षेत्र में जनपद चमोली एवं रुद्रप्रयाग के समस्त क्षेत्र शामिल हैं।

सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बताया कि स्थायी लोक अदालत आम नागरिकों को बिना न्यायालय में वाद दायर किए जन-उपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों के समाधान का सरल एवं प्रभावी विकल्प उपलब्ध कराती है। इसके अंतर्गत वायु, सड़क एवं रेल परिवहन, डाक एवं दूरसंचार सेवाएं, विद्युत एवं जलापूर्ति, स्वच्छता व्यवस्था, अस्पताल एवं औषधालय सेवाएं, बीमा, आवास एवं भू-संपदा, बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं सहित शैक्षिक संस्थानों एवं अन्य सेवा प्रतिष्ठानों से संबंधित मामलों की सुनवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि संबंधित पक्ष न्यायालय जाने से पूर्व सीधे स्थायी लोक अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं। यहां किसी प्रकार का न्याय शुल्क देय नहीं होता तथा मामलों का शीघ्र एवं प्रभावी निस्तारण किया जाता है।

सचिव ने बताया कि स्थायी लोक अदालत और उपभोक्ता फोरम के कार्यक्षेत्र में स्पष्ट अंतर है। जहां उपभोक्ता फोरम मुख्य रूप से सेवा में कमी से जुड़े मामलों की सुनवाई करता है, वहीं स्थायी लोक अदालत सेवा में कमी के अतिरिक्त प्रतिकर, धनवसूली तथा जन-उपयोगी सेवाओं से जुड़े शमनीय आपराधिक मामलों पर भी विचार कर सकती है।

उन्होंने कहा कि स्थायी लोक अदालत सबसे पहले दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति एवं समझौते के माध्यम से विवाद के समाधान का प्रयास करती है। यदि समझौता नहीं हो पाता, तो लोक अदालत मामले के गुण-दोष के आधार पर निर्णय देती है। स्थायी लोक अदालत का निर्णय अंतिम एवं सभी पक्षों पर बाध्यकारी होता है तथा इसके विरुद्ध किसी प्रकार की अपील का प्रावधान नहीं है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने जनपदवासियों से अपील की है कि जन-उपयोगी सेवाओं से संबंधित विवादों के समाधान के लिए स्थायी लोक अदालत की व्यवस्था का अधिकाधिक लाभ उठाएं और बिना अनावश्यक खर्च एवं लंबी न्यायिक प्रक्रिया के त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय प्राप्त करें।

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