विशिष्ट व्यक्तित्व व्याख्यानमाला में साझा की तीन दशकों की संगीत यात्रा, शिक्षकों के सवालों के दिए जवाब
लोकगायक किशन महिपाल का डायट में सम्मान

चमोली –
विशिष्ट व्यक्तित्व व्याख्यानमाला के तहत जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) चमोली, गौचर में प्रसिद्ध लोकगायक, संगीतकार एवं निर्देशक किशन महिपाल के व्याख्यान का आयोजन किया गया। कौशलम् कक्षा-10 के तीन दिवसीय प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में उन्हें विशिष्ट व्यक्तित्व के रूप में आमंत्रित किया गया था।
गुरुवार को व्याख्यान से पूर्व डायट के प्राचार्य आकाश सारस्वत ने किशन महिपाल को सम्मान पत्र, स्मृति चिह्न एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्हें श्रीमद्भागवत पुस्तक भी भेंट की गई।
अपने संबोधन में किशन महिपाल ने करीब तीन दशकों की अपनी संगीत यात्रा के अनुभव शिक्षकों के साथ साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में उनका पहला संगीत एल्बम आया, जबकि वर्ष 2011 में पहली बार उन्हें अपनी टीम के साथ मंच पर प्रस्तुति देने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने के दौरान आर्थिक तंगी समेत अनेक चुनौतियां सामने आईं, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी संगीत यात्रा को रुकने नहीं दिया।
उन्होंने अपने संघर्ष, लोक संगीत के प्रति लगाव और रचनात्मक सफर से जुड़े अनुभव साझा करते हुए कहा कि लोक संस्कृति और संगीत उनकी जीवन यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। शिक्षकों ने उनसे संगीत, लोक संस्कृति और उनके रचनात्मक सफर से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे, जिनका उन्होंने सहजता से जवाब दिया। शिक्षकों के आग्रह पर किशन महिपाल ने अपने लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति भी दी। कोरी कोरी’, ‘महल धरिया छिन’, ‘राजा ना रानी’, ‘जख दयबतों का ठौ छन भेजी’ और ‘जय बद्री विशाल’ जैसे गीतों की प्रस्तुति से पूरा वातावरण लोक संस्कृति और संगीत की रंगत में रंग गया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ संकाय सदस्य राजेंद्र प्रसाद मैखुरी, वीरेंद्र सिंह कठैत, सुबोध कुमार डिमरी, गोपाल प्रसाद कपरुवाण, मृणाल जोशी, बच्चन जितेला, नीतू सूद, अनीता चंदोला, निशांत वशिष्ठ, पुष्पा कनवासी, मनोज हटवाल, ललित मोहन पांडे, वीरेंद्र सिंह नेगी और रविंद्र रावत समेत अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन संकाय सदस्य डॉ. कमलेश कुमार मिश्र ने किया।


