डंडी-कंडी के सहारे बीमारों को सड़क तक पहुंचाने को मजबूर ग्रामीण।

आज़ादी के 79 वर्ष बाद भी सेरा–मालकोटी सड़क से वंचित
पोखरी।
इक्कीसवीं सदी में जहां मानव चांद और मंगल ग्रह तक पहुंच चुका है, वहीं विकासखंड पोखरी की सेरा–मालकोटी ग्राम पंचायत आज़ादी के 79 वर्ष बाद भी सड़क सुविधा से वंचित है। सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों की खरीदारी, तहसील संबंधी कार्यों और इलाज के लिए पोखरी बाजार व तहसील तक पहुंचने हेतु करीब पांच किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई तय करनी पड़ती है। ग्रामीण पीठ पर सामान लादकर इसी दुर्गम पैदल मार्ग से आवागमन करने को मजबूर हैं।
क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जूनियर स्तर की पढ़ाई के लिए उन्हें जूनियर हाईस्कूल रौता तथा उच्च शिक्षा के लिए पीजी कॉलेज पोखरी जाना पड़ता है। इसके लिए बच्चों को प्रतिदिन पांच किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई और फिर पांच किलोमीटर पैदल उतरकर घर लौटना पड़ता है।
स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब बीमार बुजुर्गों, बच्चों या प्रसवकालीन महिलाओं को अस्पताल ले जाना होता है। ग्राम प्रधान राजेश सिंह भंडारी और ग्रामीण महावीर नेगी ने बताया कि सड़क न होने के कारण ग्राम पंचायत के तीन तोक—सेरा, मालकोटी और कुमेडाग—के लगभग 60 परिवार वर्षों से परेशान हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि आज बृहस्पतिवार सुबह गांव निवासी कुंवर सिंह की अचानक तबीयत बिगड़ गई। सड़क न होने के कारण उन्हें डंडी-कंडी के सहारे कंधों पर लादकर सड़क तक पहुंचाया गया, जिसके बाद इलाज के लिए देहरादून ले जाया गया। इससे पहले तीन माह पूर्व सावित्री देवी को भी इसी प्रकार डंडी और चारपाई के सहारे सड़क तक पहुंचाकर अस्पताल ले जाया गया था। ऐसे कई मामले गांव में सामने आ चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले दस वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। लगभग पांच किलोमीटर लंबी सड़क को स्वीकृति भी मिल चुकी है, लेकिन संबंधित विभाग का कहना है कि फाइल अभी वित्त विभाग में लंबित है, जिससे कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता मोहम्मद शादिक उद्दीन ने बताया कि सड़क की डीपीआर चीफ कार्यालय को भेजी गई थी, जहां से आपत्ति लगने के बाद फाइल वापस आ गई। हालांकि अब इस सड़क को पीएमजीएसवाई फेज-4 में शामिल कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई उसी के तहत की जाएगी।


