
डॉ योगेश धस्माना देहरादून
उत्तराखंड राज्य गठन के 25 वो वर्षगांठ पर दून लाइब्रेरी में ब्रह्मकमल के साथ आयोजित संगोष्ठी में विकास के नाम पर ढांचागत विकास तो हुआ ,पर इसका लाभ स्थानीय जनता को उनकी आजीविका संवर्धन में नहीं मिल सका।
संगोष्ठी में कहा गया कि राज्य गठन के 25 वर्षों के बाद भी राज्य के विकास का मॉडल न बन पाना दुर्भाग्यपूर्ण इस ।संगोष्ठी में आम राय थी कि राज्य में पर्यटन विकास के नाम पर देहरादून सहित सभी शहर यातायात के बोझ तले अपना वैभव और अस्तित्व खोने लगे है। इस सर्वदलीय बैठक में दून में एलिवेटेड सड़क योजना को लाभकारी बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की गई।
इस मंथन कार्यक्रम में संगोष्ठी के संयोजक अभिनव थापर का कहना की टिहरी डाम से मिलने वाली रॉयल्टी ओर 12 प्रतिशत लाभांश का न मिलना चिंताजनक हे। अब तक बांध से जो 36 हजार करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ हैं,उसमें से एक कौड़ी भी उत्तराखंड के हिस्से में नहीं आई हैं।
उक्रांद की ओर से शांति भट्ट का कहना था कि सशक्त भू कानून न बनने से भूमि के प्राकृतिक संसाधनों पर पूंजीपतियों का कब्जा हो गया है।ओर मूल निवासी उनका बंधवा मजदूर बन कर रह गया है। बी.जे.पी. की ओर से विधायक विनोद चमोली का कहना था कि राज्य को संवारने में सभी को मिल जुल कर काम करना होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना था कि भाजपा के नए विकाश के मॉडल ने हमारी संस्कृति के साथ ही पहाड़ी स्वर्णकार लोगों के व्यवसाय को समाप्त कर दिया है।संस्कृतिकर्मी डॉ राकेश भट्ट का कहना था कि राज्य की संस्कृति न होने से लोक कला ओर कलाकार आर्थिक रूप से दम तोड़ रहे हैं।
चर्चा में विनोद उनियाल,लोक गायक सौरभ मैठाणी, डॉ राजेंद्र डोभाल, पद्मश्री बसंती बिष्ट, ओर किशोर उपाध्याय,ने प्रमुख रूप से भाग लिया। दून लाइब्रेरी एवं शोध केंद्र की ओर से निकोलस,चंद्रशेखर तिवारी ओर डॉ योगेश धस्माना ने अतिथियों का स्वागत कर लाइब्रेरी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।इस अवसर पर बारामासा के संपादक ओर विचारक राहुल कोटियाल भी उपस्थित थे।उत्तराखंड राज्य गठन के 25 वो वर्षगांठ पर दून लाइब्रेरी में ब्रह्मकमल के साथ आयोजित संगोष्ठी में विकास के नाम पर ढांचागत विकास तो हुआ ,पर इसका लाभ स्थानीय जनता को उनकी आजीविका संवर्धन में नहीं मिल सका।संगोष्ठी में कहा गया कि राज्य गठन के 25 वर्षों के बाद भी राज्य के विकास का मॉडल न बन पाना दुर्भाग्यपूर्ण है।संगोष्ठी में आम राय थी कि राज्य में पर्यटन विकास के नाम पर देहरादून सहित सभी शहर यातायात के बोझ तले अपना वैभव और अस्तित्व खोने लगे है। इस सर्वदलीय बैठक में दून में एलिवेटेड सड़क योजना को लाभकारी बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की गई।
इस मंथन कार्यक्रम में संगोष्ठी के संयोजक अभिनव थापर का कहना की टिहरी डाम से मिलने वाली रॉयल्टी ओर 12 प्रतिशत लाभांश का न मिलना चिंताजनक हे। अब तक बांध से जो 36 हजार करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ हैं,उसमें से एक कौड़ी भी उत्तराखंड के हिस्से में नहीं आई हैं।
उक्रांद की ओर से शांति भट्ट का कहना था कि सशक्त भू कानून न बनने से भूमि के प्राकृतिक संसाधनों पर पूंजीपतियों का कब्जा हो गया है।ओर मूल निवासी उनका बंधवा मजदूर बन कर रह गया है। बी.जे.पी. की ओर से विधायक विनोद चमोली का कहना था कि राज्य को संवारने में सभी को मिल जुल कर काम करना होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना था कि भाजपा के नए विकाश के मॉडल ने हमारी संस्कृति के साथ ही पहाड़ी स्वर्णकार लोगों के व्यवसाय को समाप्त कर दिया है।संस्कृतिकर्मी डॉ राकेश भट्ट का कहना था कि राज्य की संस्कृति न होने से लोक कला ओर कलाकार आर्थिक रूप से दम तोड़ रहे हैं। चर्चा में विनोद उनियाल,लोक गायक सौरभ मैठाणी, डॉ राजेंद्र डोभाल, पद्मश्री बसंती बिष्ट, ओर किशोर उपाध्याय,ने प्रमुख रूप से भाग लिया।दून लाइब्रेरी एवं शोध केंद्र की ओर से निकोलस,चंद्रशेखर तिवारी ओर डॉ योगेश धस्माना ने अतिथियों का स्वागत कर लाइब्रेरी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।इस अवसर पर बारामासा के संपादक ओर विचारक राहुल कोटियाल भी उपस्थित थे ।


