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भालू के आतक से परेशान जनपद के तीन विकास खंडो के लोग परेशान

हर भालू को होती है 2000 कैलोरी की आवश्यकता के चलते होता है खुंखार

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महाबीर रावत

चमोली : चमोली जिले में शरद ऋतु शुरू होते ही भालुओं का आंतक शुरू हो गया है। जनपद के तीन विकास खंड इस बार भालू के  आतंंक  से प्रभावित है  आम जनमानस  वन विभाग के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा है।

शरद ऋतु शुरू होते ही जिले में भालू का आंतक तेजी से बढ़ गया है। जिससे लोग दहशत में हैं। कुछ दिनों पहले डुमक गांव में भालू ने एक व्यक्ति को मार दिया था, जबकि गंभीर घायल पत्नी को हेलीकॉप्टर से ऋषिकेश एम्स में भर्ती किया गया। जोशीमठ रवि ग्राम, सुनील, सिंगधार और दशोली के मठ, बेमरू , स्यूंण, लदांऊ के साथ ही निजमुला घाटी के साथ ही नंदा नगर विकास खंड मै भालू का आतंंक बना हुआ है। जोशीमठ में महिलाओं ने वन विभाग के खिलाफ आंदोलन भी किया गया। वहीं बढ़ते भालू के आंतक से परेशान होने पर रामलीला में रावण दरवार में भी फरियाद पहुंची। बुधवार रात्रि सीमांत जुम्मा क्षेत्र में भालू ने लोगों के घरों के दरवाजे तोड़कर भारी नुक्सान पहुंचा है।वही दशोली के मीमरानी मै भी एक मवेशी को मार दिया था जिसे आम जम्मांस का घरों से निकले मै भी  डर लग रहा है।अधिकांश भालू सर्दियों के महीनों में भोजन की कमी के कारण शीतनिद्रा में चले जाते हैं। इस लंबी अवधि तक जीवित रहने के लिए, उन्हें अपने शरीर में पर्याप्त वसा जमा करना आवश्यक होता है। भोजन की तीव्र आवश्यकता (हाइपरफेजिया): शरद ऋतु में, भालू दिन में लगभग 20,000 कैलोरी तक का उपभोग करने का प्रयास करते हैं। इस जैविक आवश्यकता के कारण, वे भोजन के हर संभावित स्रोत, चाहे वह प्राकृतिक हो या मानव निर्मित (जैसे कचरा), की तलाश में रहते हैं।

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