चमोली पुलिस और प्रशासन ने भूकम्प आपदा से निपटने की तैयारियाँ परखने हेतु किया मॉक ड्रिल का आयोजन
चमोली जिले मै 6 स्थानों पर किया गया मॉक ड्रिल

चमोली –
उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण द्वारा पूरे प्रदेश में एक राज्य स्तरीय भूकम्प मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य किसी भी बड़े भूकंप की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, राहत एवं बचाव कार्यों की वास्तविक तैयारी को परखना तथा सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करना था। इस अभ्यास में जनपद चमोली की IRS (Incident Response System) से जुड़े अधिकारी एवं कार्मिक तथा आईटीबीपी, एसएसबी, एनडीआरएफ, सीआईएसएफ, एसडीआरएफ, अग्निशमन, क्यूआरटी, स्थानीय पुलिस, होमागार्ड, पीआरडी, डीडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों ने सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया।
शनिवार को ड्रिल के दौरान बनाई गई काल्पनिक आपात स्थिति- मॉक ड्रिल के तहत प्रातः जनपद में भूकम्प के तेज झटके महसूस होने की स्थिति उत्पन्न की गई। पुलिस कंट्रोल रूम व आपदा कंट्रोल रूम चमोली द्वारा सभी थानों एवं तहसीलों को अलर्ट किया गया और जान-माल के नुकसान के सम्बन्ध में जानकारी एकत्रित की गयी। जिसमें जनपद के कुल 06 स्थानों- रैणी के पास ऋषिगंगा नदी में झील बनने, BRO मोटर पुल क्षतिग्रस्त व दोनों ओर 50 फंसे लोग होने। ज्योतिर्मठ GMVN भवन व एक आवासीय भवन क्षतिग्रस्त होने व उसमें 15–20 लोग फंसे होने। पीपलकोटी में निर्माणाधीन टनल क्षतिग्रस्त होने से 08–10 कर्मी टनल के अंदर फंसे होने।जिला चिकित्सालय गोपेश्वर का आपात कक्ष क्षतिग्रस्त होने से मरीज व स्टाफ अन्दर ही फंसे होने।नन्दानगर में कस्तूरबा गांधी विद्यालय के 02 कमरे क्षतिग्रस्त हुए है 35–40 छात्र-छात्राएँ फंसे होने। तहसील थराली में पहाड़ी से मलबा गिरने की अफवाह से भगदड़, 10–12 लोग घायल हो गए है की सूचना प्राप्त हुई।

इन 6 स्थानों पर राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 06 अलग-अलग रेस्क्यू टीमें जिनमें आईटीबीपी, एसएसबी, एनडीआरएफ, सीआईएसएफ, एसडीआरएफ, अग्निशमन, क्यूआरटी, स्थानीय पुलिस, होमागार्ड, पीआरडी, डीडीआरएफ व स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीमें को भेजा गया। राहत एवं बचाव कार्यों में तैनात सभी संयुक्त टीमों ने छः विभिन्न स्थानों से उत्कृष्ट समन्वय स्थापित करते हुए तत्परता और कुशलता के साथ पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न किए।
मॉक ड्रिल से पूर्व स्पोर्ट्स स्टेडियम गोपेश्वर में *पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पँवार* द्वारा पुलिस बल को संबोधित करते हुए कहा —*आपदा चेतावनी देकर नहीं आती लेकिन हमारी तैयारी हर चुनौती का जवाब होनी चाहिए। इसलिए हमारा उद्देश्य सिर्फ रेस्पॉन्स नहीं, बल्कि परफेक्ट को-ऑर्डिनेशन के जरिए ‘जीवन रक्षा की अधिकतम क्षमता’ सुनिश्चित करना है। वास्तविक परिस्थितियों में हमारे कदम मजबूत, हमारी रणनीति स्पष्ट और हमारा समन्वय त्रुटिहीन होना चाहिए। किसी भी संकट की घड़ी में पुलिस एवं सभी एजेंसियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में अभ्यास हमारे प्रशिक्षण को और अधिक धार देते हैं तथा मनोबल को मजबूत करते हैं। यह मॉक ड्रिल सिर्फ अभ्यास नहीं—बल्कि जीवन बचाने के संकल्प को मजबूत करने का सामूहिक प्रयास है।*

जिलाधिकारी गोरव कुमार एवं पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पँवार आपदा कंट्रोल रूम से निरंतर राहत एवं बचाव अभियानों का नेतृत्व करते रहे। दोनों अधिकारियों ने कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम के माध्यम से रेस्क्यू टीमों से पल–पल की स्थिति की जानकारी प्राप्त की तथा आवश्यकता के अनुसार त्वरित निर्णय लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। प्रभावी नेतृत्व एवं सुचारू समन्वय के चलते सभी टीमें अलर्ट मोड में उच्च प्रोफेशनल दक्षता के साथ रेस्क्यू कार्यों में डटी रहीं, जिससे अभ्यास के उद्देश्य सफलतापूर्वक पूरा हुआ।
मॉक ड्रिल के दौरान आपदा कंट्रोल रूम में अपर जिलाधिकारी चमोली विवेक प्रकाश, आपदा प्रबन्धन अधिकारी नन्द किशोर जोशी तथा सम्बन्धित तहसीलों के विभागीय अधिकारी यथा, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, पशुपालन, मेडिकल, जल संस्थान, पूर्ति, यू०पी०सी०एल०, पुलिस, पी०एम०जी०एस०वाई०, अग्निशमन के अधिकारी सम्बन्धित तहसीलों मौजूद रहें।


