सीएचसी थराली: विवादों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा, अब सरकारी विज्ञप्ति पर उठे सवाल
थराली/ चमोली –
ऐसा प्रतीत होता है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) थराली का विवादों से पीछा छूटने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दो महीनों में एक के बाद एक सामने आए मामलों के बीच अब एक सरकारी प्रेस विज्ञप्ति की सत्यता को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। यह विवाद थराली विकासखंड के गोठिंडा गांव में बारिश के दौरान हुए एक प्रसव को लेकर है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के दावे और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान आमने-सामने हैं।
सूचना विभाग के माध्यम से 2 जुलाई को जारी स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक विज्ञप्ति में दावा किया गया कि लगातार बारिश से सड़क बंद होने के कारण स्वास्थ्य विभाग की टीम करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर गर्भवती महिला तक पहुंची और रास्ते में ही उसका सुरक्षित प्रसव कराया। विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि जच्चा और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। हालांकि, घटना से जुड़े प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय ग्रामीणों के दावे विभाग के इस संस्करण से बिल्कुल अलग हैं।
**दो महीने में लगातार विवादों में रहा सीएचसी थराली**
गौरतलब है कि पिछले दो महीनों में सीएचसी थराली कई कारणों से चर्चा में रहा है। सबसे पहले अस्पताल की पहली मंजिल पर आवारा कुत्तों के घूमने और वार्ड में लेटे रहने का मामला सामने आया। इसके बाद अस्पताल में एक्सपायरी दवाओं का मुद्दा उठा। फिर कुराड़ गांव की एक गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की कथित चिकित्सकीय लापरवाही के चलते मौत का मामला सुर्खियों में रहा। इस घटना को लेकर अभी विवाद पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब सरकारी प्रेस विज्ञप्ति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
**सरकारी विज्ञप्ति में क्या कहा गया**
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अभिषेक गुप्ता की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार बुधवार और गुरुवार की रात हुई भारी बारिश के बीच गोठिंडा निवासी पुष्पा देवी को रात लगभग दो बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजन उन्हें सीएचसी थराली ला रहे थे, लेकिन मोटर मार्ग बंद होने से अस्पताल पहुंचना संभव नहीं हो पाया। सूचना मिलने पर सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय गुप्ता के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग की टीम आवश्यक चिकित्सा सामग्री लेकर गांव के लिए रवाना हुई और लगभग 10 किलोमीटर पैदल चलकर प्रसूता तक पहुंची। विभाग का दावा है कि परिस्थितियों को देखते हुए टीम ने रास्ते में ही सुरक्षित प्रसव कराया और बाद में जच्चा तथा नवजात को चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई।
**प्रत्यक्षदर्शियों ने विभागीय दावे पर उठाए सवाल**
दूसरी ओर, प्रसूता को गांव से प्रसव स्थल तक लाने वाले टैक्सी चालक बिरेंद्र सोनी ने अपने फेसबुक लाइव के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के दावे पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रसव उनकी माता किशनी देवी ने कराया, जो पहले घरेलू दाई का कार्य कर चुकी हैं। उनके अनुसार महिला का प्रसव सुबह **8:05 बजे** ही हो चुका था, जबकि स्वास्थ्य विभाग की टीम करीब **10:30 बजे** मौके पर पहुंची।
बिरेंद्र सोनी का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रसव के बाद जच्चा और नवजात को आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई, लेकिन सरकारी विज्ञप्ति में सुरक्षित प्रसव कराने का पूरा श्रेय स्वयं ले लिया, जो वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाता। प्रसव स्थल पर मौजूद आशा कार्यकर्ता मीना देवी तथा ग्रामीण नरेंद्र कुमार ने भी कथित तौर पर यही कहा कि वे पूरी रात प्रसूता के साथ मौजूद थे और स्वास्थ्य विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही प्रसव हो चुका था।
**सीएमओ ने दिए जांच के संकेत**
इन परस्पर विरोधी दावों के बाद सरकारी प्रेस विज्ञप्ति की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अभिषेक गुप्ता ने कहा कि उनके कार्यालय को थराली से जो सूचना प्राप्त हुई थी, उसी के आधार पर प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में तथ्यों में अंतर पाया जाता है तो पूरे मामले की विभागीय जांच कराई जाएगी।
अब यह विवाद केवल एक प्रसव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी सूचनाओं की प्रमाणिकता और जवाबदेही से भी जुड़ गया है। ऐसे में जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विषम परिस्थितियों में सुरक्षित प्रसव का वास्तविक श्रेय किसे जाता है और आधिकारिक विज्ञप्ति में दर्ज तथ्यों का आधार क्या था।



