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राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोपेश्वर में बी.एड. प्रथम सेमेस्टर हेतु प्रवेशोत्सव का आयोजन

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चमोली –

राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोपेश्वर के बी.एड. विभाग द्वारा बी.एड. प्रथम सेमेस्टर के नवप्रवेशी छात्रों के स्वागत हेतु प्रवेशोत्सव का आयोजन किया गया।प्रवेशोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत सर्वप्रथम सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया।

सुंदरकांड, श्रीरामचरितमानस का वह अत्यंत महत्वपूर्ण कांड है जिसमें भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी की भक्ति, साहस, बुद्धि और निष्ठा का विस्तृत वर्णन मिलता है। सुंदरकांड पाठ के माध्यम से विद्यार्थियों के जीवन में आत्मविश्वास, सकारात्मक ऊर्जा, धैर्य एवं सफलता का संदेश दिया गया। यह पाठ नवप्रवेशी छात्रों के लिए एक प्रेरणास्रोत के रूप में रहा, जिससे उनके शैक्षणिक जीवन की मंगलमय शुरुआत हो सके।

इसके पश्चात हनुमान चालीसा पाठ का सामूहिक रूप से वाचन किया गया। इस पाठ के माध्यम से विद्यार्थियों को परिश्रम, अनुशासन, समर्पण और गुरु-भक्ति जैसे जीवन मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी गई। कार्यक्रम के अंतर्गत हवन का भी आयोजन किया गया, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ आहुतियाँ दी गईं। हवन का उद्देश्य वातावरण को शुद्ध करना तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना रहा। प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जनपद चमोली के पुलिस अधीक्षक डॉ. सुरजीत सिंह पंवार तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में सुबोध प्रेम विद्या मंदिर, गोपेश्वर के संस्थापक डॉ. राकेश गैरोला जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एम. पी. नगवाल जी द्वारा की गई।कार्यक्रम का संपूर्ण समन्वय बी०एड० विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो० अमित कुमार जयसवाल द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पावन सुंदरकांड पाठ से हुई और अंत तक संपूर्ण आयोजन सुचारु रूप से संपन्न हुआ। पूरे कार्यक्रम का संचालन एवं व्यवस्था प्रो. जयसवाल की सतर्क देखरेख और मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक किया गया।

कार्यक्रम के दौरान अपने उद्बोधन में प्रो० जयसवाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार प्राचीन भारतीय शैक्षिक मूल्यों और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के समन्वय से एक सशक्त, मूल्य-आधारित एवं प्रभावी शिक्षा व्यवस्था का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आधुनिक तकनीकी ज्ञान को साथ लेकर चलना आज के समय की आवश्यकता है, जिससे विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव हो सके और शिक्षा प्रणाली को और अधिक समृद्ध एवं व्यवहारिक बनाया जा सके।कार्यक्रम मुख्य अतिथि डॉ. सुरजीत सिंह पंवार ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में शिक्षकों की समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाला नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। उन्होंने बी.एड. के नवप्रवेशी छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य में वे जिस भी विद्यालय या समाज का हिस्सा बनेंगे, वहां उनके विचार, आचरण और मूल्य ही आने वाली पीढ़ी का निर्माण करेंगे।

डॉ. पंवार ने विद्यार्थियों को जीवन में बार-बार असफलता मिलने पर भी हार न मानने की प्रेरणा देते हुए कहा कि असफलताएँ व्यक्ति को मजबूत बनाती हैं और सफलता की ओर ले जाने का मार्ग प्रशस्त करती हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए छात्रों को निरंतर प्रयास, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया तथा नवप्रवेशी छात्रों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं प्रदान कीं।

विशिष्ट अतिथि डॉ. राकेश गैरोला जी ने अपने उद्बोधन में शिक्षा के नैतिक एवं संस्कारात्मक पक्ष पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न होकर विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारियों का विकास करना भी है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो. एम. पी. नगवाल जी ने नवप्रवेशी छात्रों का स्वागत करते हुए कहा कि बी.एड. पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार एवं संवेदनशील शिक्षक बनने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ-साथ चरित्र निर्माण पर भी विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।कार्यक्रम के अंत में बी०एड० विभाग के सत्र 2024-25 में हुई प्रतियोगिताओं का पुरस्कार वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में बी० एड० विभाग के सभी प्राध्यापक भी उपस्थित रहे।

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