पहाड़ी क्षेत्रों में इन दिनों पांडव नृत्य की धूम

गौचर।
गौचर नगर पालिका क्षेत्र के पनाई एवं विकास खण्ड पोखरी के गंगा घाटी गांव बमोथ करछुना आदि कई गांवों में महाभारत की कथा को जीवंत बनाए रखने व धार्मिक आस्था और संस्कृति विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी पहुंचाने के लिए जहां ढोल दमाऊं की थाप व पंडितों द्वारा मंत्रोचार पांडव पाश्व और द्रौपदी के रूप में अवतरित होकर उनकी वीरता संघर्ष और धर्म अधर्म के संदेशों को जागर लगाकर नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत कर रहे हैं।

दर्शकों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि एक गहन अध्यात्मिक और सामाजिक अनुष्ठान होते हैं। इस प्रकार के आयोजनों से पौराणिक संस्कृति को जीवंत बनाए रखने को बल मिलता है। गौचर व्यापार संघ अध्यक्ष राकेश लिंगवाल का कहना है कि पनाई गांव में आयोजित पांडव लीला के सफल संचालन करने में उमराव सिंह नेगी, रघुनाथ सिंह बिष्ट, पंडित अनशूया जोशी,गिरीश जोशी, चन्द्र सिंह चौहान, अनशूया नेगी, नरेंद्र नेगी, रंजीत सिंह, बीरेंद्र बिष्ट,दयाल चौहान, रणजीत कनवासी, विपिन नेगी, विपुल नेगी, कुलदीप चौधरी, अवनीश चौधरी आदि का विशेष योगदान है। दूसरी ओर करछुना में आयोजन समिति के अध्यक्ष खुशाल सिंह के नेतृत्व में आयोजित पांडव लीला में पलायन कर चुके लोगों ने भी घर वापसी की है। बमोथ के पंडित प्रदीप लखेड़ा का कहना है कि महा भारत की कथा को जीवंत बनाए रखने व धार्मिक आस्था व संस्कृति विरासत को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए इस प्रकार के आयोजन कारगर साबित होते हैं।


