सीमांत हिमालय में नेशनल अल्ट्रा मैराथन की तैयारी, वाइब्रेंट विलेज योजनाओं को मिलेगी रफ्तार**
चमोली –
जिले के सीमांत और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अप्रैल माह में प्रस्तावित नेशनल अल्ट्रा मैराथन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। भारत–तिब्बत–चीन सीमा से लगे नीती घाटी क्षेत्र में होने वाला यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सरहदी गांवों में जीवंत जनजीवन, सुरक्षा और विकास का संदेश देने वाला होगा। इसके माध्यम से चमोली के 14 वाइब्रेंट विलेज में ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने से जुड़ी योजनाओं को भी गति मिलने की उम्मीद है।
चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने नीती घाटी का दौरा करने के बाद सोमवार को बताया कि इस वर्ष नीती घाटी में राष्ट्रीय स्तर की भव्य अल्ट्रा मैराथन का आयोजन किया जाएगा। आयोजन की तैयारियों के मद्देनजर उन्होंने क्षेत्र की सभी पुलिस चौकियों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान मलारी पुलिस चौकी की स्थिति संतोषजनक न पाए जाने पर उसके तत्काल मरम्मत और आधुनिकीकरण के लिए वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए।
शीतकाल के बावजूद इस समय नीती घाटी में मानव गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं, जो सुरक्षा और सीमांत क्षेत्रों में जीवन की निरंतरता के लिए आवश्यक मानी जा रही हैं। नीती घाटी में स्थित ‘छोटा अमरनाथ’ के नाम से प्रसिद्ध टिम्मरसैंण महादेव के दर्शनों के लिए इन दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। वर्तमान शीतकालीन यात्रा के दौरान प्रतिदिन 500 से 1000 श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने स्वयं नीती घाटी और टिम्मरसैंण महादेव पहुंचकर श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम आवागमन और सीमांत क्षेत्रों में पुलिसिंग को मजबूत करने के उद्देश्य से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद श्रद्धालुओं से संवाद कर यात्रा मार्ग की स्थिति, सुरक्षा इंतजाम और ठहरने की व्यवस्थाओं के बारे में फीडबैक भी लिया।आमतौर पर शीतकाल में नीती–मलारी घाटी के गांवों के लोग निचले क्षेत्रों में स्थित अपने शीतकालीन प्रवास गांवों में चले जाते हैं, लेकिन अब कई स्थानीय लोग सरहद के सिपाही के रूप में शीतकाल में भी अपने सीमांत गांवों में डटे हुए हैं। मलारी भ्रमण के दौरान पुलिस अधीक्षक ने स्थानीय नागरिकों के साथ संवाद किया। वरिष्ठ नागरिक कपिल रावत और राजेंद्र राणा सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि शीतकाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं, लेकिन वर्तमान में क्षेत्र में मेडिकल सुविधाएं बंद रहती हैं, जिससे आपात स्थिति में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि नीती, मलारी और बाम्पा में होम-स्टे का संचालन किया जा रहा है, लेकिन ज्योतिर्मठ के बाद पूरी घाटी में कहीं भी पेट्रोल पंप नहीं होने से पर्यटन और स्थानीय लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है ।इस दौरान बीआरओ के कमांडिंग ऑफिसर मेजर विवेक सोनी और द्वितीय प्रभारी सुनील कुमार त्रिपाठी ने बताया कि सीमा क्षेत्र तक सड़क निर्माण का कार्य लगातार जारी है, जिससे सामरिक दृष्टि से मजबूती के साथ-साथ स्थानीय विकास और पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है।


