वन विभाग की महिला फील्ड कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल, संयुक्त परिषद ने सरकार से की ठोस व्यवस्था की मांग

नारायणबगड़
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, उत्तराखंड ने वन विभाग में कार्यरत महिला फील्ड कर्मचारियों की सुरक्षा,कार्य-परिस्थितियों और मूलभूत सुविधाओं को लेकर गंभीर चिंता जताई है। परिषद ने इस संबंध में मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजकर राज्य सरकार से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया है कि वन विभाग में तैनात महिला कर्मचारी दूरस्थ जंगल क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में काम करती हैं,जहां जंगली जानवरों का खतरा,संचार के सीमित साधन, आवागमन की दिक्कतें और आवश्यक सुविधाओं का अभाव उनके लिए बड़ा जोखिम बन रहा है। कई स्थानों पर उन्हें रात में भी ड्यूटी करनी पड़ती है,जबकि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। सुरक्षा और सुविधाओं की कमी पर उठे सवाल संयुक्त परिषद के अनुसार,कई फील्ड पोस्टिंग पर महिलाओं के लिए अलग शौचालय,सुरक्षित आवास,प्रकाश व्यवस्था और परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा, दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की कमजोरी और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित सहायता न मिल पाना भी चिंता का विषय है।
तकनीकी और प्रशासनिक उपायों की मांग
परिषद ने सरकार से मांग की है कि महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जीपीएस आधारित ट्रैकिंग, इमरजेंसी हेल्पलाइन,उपयुक्त संचार उपकरण और आवश्यक सुरक्षा किट उपलब्ध कराई जाए। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में महिला कर्मचारियों को अकेले न भेजने,रात्रि ड्यूटी में विशेष सावधानी बरतने तथा कार्यस्थलों पर निगरानी व्यवस्था (जैसे सीसीटीवी) सुनिश्चित करने की भी बात कही गई है।पोस्टिंग नीति और मातृत्व सुविधाओं पर जोर पत्र में यह भी उल्लेख है कि महिला कर्मचारियों की पोस्टिंग यथासंभव उनके गृह जनपद या निकटवर्ती क्षेत्रों में की जाए।
गर्भावस्था और मातृत्व से जुड़ी सुविधाओं,अवकाश,सुरक्षित आवास और स्वास्थ्य संबंधी प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग भी की गई है।सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपील संयुक्त परिषद ने कहा है कि महिला फील्ड कर्मचारियों की सुरक्षा केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं,बल्कि मानवीय और संवैधानिक दायित्व भी है। परिषद ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि वह विभागीय स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें और जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं लागू कराए, ताकि महिलाएं बिना भय के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।


