उत्तराखंड

पंचायती राज मंत्री से मुलाक़ात किया प्रधान संगठन ने , समस्याओ के समाधान की मांग

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देहरादून –

उत्तराखंड प्रधान संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के  पंचायती राज मंत्री से शिष्टाचार भेंट कर ग्राम स्तर पर आ रही व्यवहारिक दिक्क़तो से रूबरू कराया मुलाक़ात के दौरान राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप पंचायतों के सशक्तीकरण पर विस्तृत चर्चा है।

पंचायत राज मंत्री के साथ बैठक का प्राथमिक उद्देश्य केवल औपचारिकता का निर्वहन करना नहीं था, अपितु उत्तराखंड की ग्राम पंचायतों के समक्ष उपस्थित गंभीर चुनौतियों को सरकार के सम्मुख प्रमुखता से प्रस्तुत करना था।

प्रमुख मुद्दों का विश्लेषण एवं चर्चा:

बैठक के दौरान राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप पंचायतों के सशक्तीकरण पर विस्तृत चर्चा की गई। वर्तमान में उत्तराखंड की पंचायतों को निम्नलिखित प्रमुख समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिन्हें मंत्री जी के समक्ष प्रस्तुत किया गया: बजट आवंटन में विलंब: पंचायतों को विकास कार्यों हेतु समय पर निधि प्राप्त न होने के कारण कई महत्वपूर्ण योजनाएं लंबित हैं।

​मानदेय में वृद्धि की मांग: ग्राम प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय को वर्तमान मुद्रास्फीति और उनके कर्तव्यों के अनुरूप बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। डिजिटल चुनौतियाँ: पर्वतीय क्षेत्रों में खराब कनेक्टिविटी के कारण ‘ऑनलाइन उपस्थिति’ और ‘डिजिटल भुगतान’ (PFMS) में आने वाली तकनीकी बाधाओं को प्रमुखता से उठाया गया। अधिकारों का विकेंद्रीकरण: पंचायती राज अधिनियम के तहत पंचायतों को दिए गए अधिकारों को पूर्ण रूप से लागू करने का आग्रह किया गया।

निष्कर्ष और अपेक्षाएँ

संगठन की सभी मांगों और समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और उनके त्वरित समाधान का आश्वासन दिया। जब तक हमारी पंचायतें सशक्त नहीं होंगी, तब तक “आदर्श उत्तराखंड” का स्वप्न साकार नहीं हो सकता। प्रधान संगठन अपनी मांगों के प्रति प्रतिबद्ध है और आशा करता है कि सरकार शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लेगी।

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