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नंदानगर के ग्राम चरी में ऐतिहासिक फैसला:गांव में पूर्ण शराबबंदी

शिक्षित नेतृत्व से विकास की नई उम्मीद

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ग्रामीणों ने किरण को बनाया था निर्विरोध ग्राम प्रधान

महावीर सिंह रावत/ चमोली

नंदानगर विकासखंड की ग्राम पंचायत चेरी में आज 29 दिसंबर 2025 को आयोजित खुली ग्रामसभा बैठक ने पूरे क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम कर दी। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी में गांव को पूर्ण रूप से शराब मुक्त करने का साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। यह फैसला केवल कागजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे सख्ती से लागू करने के लिए स्पष्ट और कठोर नियम भी तय किए गए।

ग्रामसभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि गांव में शराब बेचने पर ₹21,000 और शराब खरीदने पर ₹11,000 का जुर्माना लगाया जाएगा। इतना ही नहीं, किसी भी शादी-ब्याह या सामाजिक कार्यक्रम में यदि शराब परोसी गई तो महिलाओं द्वारा उस आयोजन का पूर्ण सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि शराब परोसने वाले कार्यक्रमों में वे किसी भी स्थिति में भाग नहीं लेंगी।

यह निर्णय उत्तराखंड के गांवों में बढ़ते शराब के चलन और उससे बिगड़ते सामाजिक माहौल को देखते हुए लिया गया। ग्राम प्रधान किरन नेगी ने भावुक शब्दों में कहा, “अगर आज हमने अपने बच्चों को नहीं बचाया, तो कल गांव को कोई नहीं बचा पाएगा।” उनका यह वक्तव्य सभा में मौजूद हर व्यक्ति के दिल को छू गया।

किरन ग्राम पंचायत जनपद चमोली की वह पंचायत है, जहां ग्रामीणों ने शिक्षा और योग्यता को महत्व देते हुए एमएससी (विज्ञान में स्नातकोत्तर)तथा प्रोफेशनल फैशन डिजाइनर किरण नेगी को निर्विरोध ग्राम प्रधान चुना है। शहरों में रहकर आधुनिक सोच और पेशेवर अनुभव हासिल करने के बाद भी किरण का जुड़ाव अपनी मिट्टी से बना रहा, और यही जुड़ाव आज गांव के निर्णयों में साफ झलक रहा है।

 

गांव में पली-बढ़ी किरन  का कहना है कि उन्हें गांव की हर छोटी-बड़ी समस्या का प्रत्यक्ष अनुभव है—चाहे वह महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक परेशानियाँ हों, रास्तों की स्थिति, बिजली और स्ट्रीट लाइट की दिक्कतें हों या फिर सोलर एनर्जी के माध्यम से गांव को आत्मनिर्भर बनाने की संभावनाएँ। फैशन डिजाइनिंग जैसे रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े अनुभव ने उन्हें योजनाओं को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करने और नवाचार के साथ लागू करने की दृष्टि भी दी है। उन्होंने मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन और स्वरोजगार आधारित योजनाओं से ग्रामीणों की आय बढ़ाने पर गंभीरता से काम करने की बात कही। पहली ही बैठक में जिस दृढ़ता, स्पष्टता और सूक्ष्म नियोजन के साथ किरण ने गांव के विकास का एजेंडा रखा, उससे यह साफ संदेश गया कि जब पंचायतों में शिक्षित और पेशेवर पृष्ठभूमि वाले प्रतिनिधि आएंगे, तो बदलाव निश्चित है। चेरी गांव का यह फैसला न केवल शराबबंदी की दिशा में, बल्कि सशक्त, संवेदनशील और जिम्मेदार ग्राम स्वराज की ओर एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

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