उत्तराखंड

उफलते गधेरे से बनाया माँ नंदा की डोली ने रास्ता

वर्ष 2013 की आपदा मै बह गया था पैदल पुल

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गोपेश्वर

माँ नंदा देवी लोक जात यात्रा पर पांचवे पड़ाव पर पहुंची जहा उन्हे कई दुश्वरियों का समाना करना पड़ा महड़ बगठी से अगले पड़ाव पर जाते हुए माँ कि डोली को जेथा गाड्ड मै उफलते गधेरे से होकर जाना पड़ा , माँ नंद के  भगतगन् जान जोखिम मै डाल कर उफाते गधेरे को पार किया

उल्लेखनीय है कि माँ नंदा बुधवार को राजबगठी मै रात्रि विश्राम के बाद सुबह महड़ बगठी पहुंची जहा पूजा अर्चना के बाद मा नंदा को तेफना डिकोला रावतो के यहां रात्रि विश्राम को जाना था इसी रास्ते के बिच मै जेथा गाड़ पड़ता है जिस रास्ते माँ नंदा कि डोली को पार् होना उस स्थान पर 2013 कि आपदा मै एक पुल हुआ करता था जो आपदा मै बह गया जिला पंचायत से निर्मित पुला तब से अब तक नही बन पाया है जिस के कारण  माँ नंदा की डोली को उफालते गधेरे से जाना पड़ा गनीमत रही कि सभी पुजारी ,माँ की डोली, भगतजन सभी सुरक्षित उफालते गधेरे को पार करने मै सफल रहे उसके पश्चात माँ नंदा कि डोलो टेफाना के थोकदार वीरेंद्र सिंह रावत जी के घर तेफना पहुंच गये है

जेथा गाड़ मै वर्ष 2013 मै आई आपदा के निशान अभी भी बाकी है यहां आम लोगों को खासी मस्कत करनी पड़ है सकण्ड  के क्षेत्र पंचायत सदस्य गोविंद सिह रावत का कहना है कि जेथा गाड़ मै 2013 की आपदा मै 3 पैदल पुल बहगया था जो आजतक भी नही बना है जो कि बड़े दुख का विषय है प्रधान राजबगठी महाबीर रावत ,प्रधान महड़ बगठी  गोरव सती ने भी उक्क्त पुल के निर्माण की माग की है

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