गोपेश्वर में शराब के खिलाफ महिलाओं का जनसैलाब, पहाड़ की चौपाल से उठा सख़्त फैसल

चमोली –
चमोली के पहाड़ी गांवों में घर-घर तक पहुंच रही शराब के खिलाफ महिलाओं का सब्र अब जवाब दे गया है। सोमवार को रोपा, डेडा, बछेर सहित आसपास के दर्जनों गांवों की महिलाएं अपने दुधमुंहे बच्चों को गोद में लेकर जिला मुख्यालय गोपेश्वर पहुंचीं और आबकारी विभाग के कार्यालय के बाहर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए महिलाओं ने साफ शब्दों में कहा कि शराब की दुकानें ही नहीं, बल्कि उनके जरिये गांवों तक पहुंच रही शराब पहाड़ के समाज को खोखला कर रही है।
कलैक्ट्रेट परिसर में गूंजे नारों के बीच महिलाओं ने जिला आबकारी अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि शराब की आपूर्ति वाहनों और बैगों के जरिये खुलेआम गांवों और घरों तक हो रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठा है। प्रदर्शन में शामिल रोपा गांव की करिश्मा देवी, कला देवी, सरोज देवी, मनोरमा देवी और मंजू देवी ने कहा कि सरकार जहां नई शराब दुकानें खोलने में व्यस्त है, वहीं पहाड़ का युवा नशे की गिरफ्त में फंसकर बर्बाद हो रहा है।
महिलाओं का यह आंदोलन सिर्फ शहर तक सीमित नहीं रहा। इससे पहले रोपा गांव की चौपाल में ग्राम प्रधान करिश्मा देवी की अध्यक्षता में गांव की महिलाओं ने ऐतिहासिक फैसला लिया। तय किया गया कि गांव में किसी भी शादी-विवाह या अन्य समारोह में शराब पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। नियम तोड़ने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इतना ही नहीं, यदि कोई व्यक्ति शराब पीकर गांव में प्रवेश करता है तो उससे 5 हजार रुपये वसूले जाएंगे।
गांव की इस बैठक में सरोजनी देवी, कला देवी, मनोरमा देवी, मंजू देवी, दीपा, यशोदा, सोबती, राधा, विनीता, प्रियंका, पार्वती, कुसुम, संतोषी देवी समेत बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि अब पहाड़ की इज्जत और भविष्य दोनों को बचाने के लिए शराब के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी।
महिलाओं की इस एकजुटता ने साफ संकेत दे दिया है कि पहाड़ में अब शराब के खिलाफ आंदोलन केवल नारा नहीं, बल्कि जमीन पर उतरा जनसंघर्ष बन चुका है।



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