थराली में बच्चों को दी गई कानून और जीवन मूल्यों की जानकारी

थराली/संवाददाता
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चमोली के तत्वावधान में मंगलवार को थराली स्थित *पर्वतीय स्कॉलर्स अकादमी* में एक विशेष विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों, कानून के महत्व तथा सुरक्षित और स्वस्थ जीवनशैली की जानकारी देना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षकगण और अभिभावक उपस्थित रहे।
शिविर का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) पुनीत कुमार की अध्यक्षता में हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “कानून की समझ केवल बड़ों के लिए नहीं, बल्कि बच्चों के लिए भी आवश्यक है, क्योंकि यही समझ उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग और अपने कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदार बनाती है।” उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि भारतीय संविधान हर नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार प्रदान करता है। बाल अधिकारों पर विस्तार से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे के साथ भेदभाव, शोषण या हिंसा अस्वीकार्य है और प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान से जीने का हक प्राप्त है।
उन्होंने बच्चों को स्वस्थ जीवन जीने के लिए आवश्यक अनुशासन, स्वच्छता, संतुलित आहार और व्यायाम के महत्व पर भी प्रकाश डाला। पुनीत कुमार ने कहा कि एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ विचार पनपते हैं और जीवन में सफलता का आधार आत्मविश्वास और अनुशासन होता है।
इस अवसर पर मुख्य कानूनी प्रतिरक्षा अधिवक्ता श्री समीर बहुगुणा ने अपने उद्बोधन में कहा कि कानून समाज को व्यवस्थित करने का सबसे बड़ा साधन है। बच्चों को छोटी-छोटी बातों से ही कानून के प्रति सम्मान विकसित करना चाहिए—जैसे विद्यालय में नियमों का पालन, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा, और दूसरों के अधिकारों का आदर करना। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि देश का भविष्य उनके हाथों में है, और एक जागरूक नागरिक ही एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।वहीं डिप्टी कानूनी प्रतिरक्षा अधिवक्ता श्री मोहन पंत* ने बच्चों को *गुड टच और बैड टच* के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि यह विषय बच्चों की आत्मसुरक्षा से जुड़ा हुआ है और हर बच्चे को यह समझ होनी चाहिए कि कब किसी का व्यवहार असहज या अनुचित है। उन्होंने छात्रों को समझाया कि किसी भी असहज स्थिति में उन्हें अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से तुरंत बात करनी चाहिए। इस सत्र के दौरान छात्रों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे, जिनके उत्तर अधिवक्ताओं ने सरल शब्दों में दिए।शिविर के दौरान विद्यालय प्रबंधन की ओर से बच्चों ने “हमारे अधिकार और कर्तव्य” विषय पर समूह चर्चा और लघु नाटिका का भी मंचन किया, जिसे उपस्थित अतिथियों ने सराहा। छात्रों ने बाल अधिकारों से संबंधित पोस्टर भी प्रदर्शित किए। शिविर समाप्त होने के बाद *सिविल जज (सीनियर डिवीजन) पुनीत कुमार* ने *तलवारी* में *विधिक सहायता केंद्र (लीगल एड क्लिनिक)* का शुभारंभ किया। इस केंद्र के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क कानूनी सलाह और सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि न्याय सभी के लिए सुलभ होना चाहिए, चाहे वह किसी भी सामाजिक या आर्थिक वर्ग से हो।
इसके बाद उन्होंने *ग्वालदम* में आगामी *18 नवंबर को आयोजित होने वाले बहुउद्देशीय शिविर* की तैयारियों का जायजा लिया। इस शिविर में विभिन्न विभागों के सहयोग से स्वास्थ्य जांच, विधिक सलाह, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जानकारी और जन समस्याओं के निस्तारण के लिए शिविर लगाए जाएंगे। पुनीत कुमार ने स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को समझा तथा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। दिन के अंत में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव की अध्यक्षता में *थराली, देवाल और नारायणबगड़* क्षेत्र के विधिक मित्रों (पैनल अधिवक्ताओं) की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में विधिक जागरूकता को और प्रभावी बनाने की रणनीति पर चर्चा की गई। यह निर्णय लिया गया कि आने वाले महीनों में प्रत्येक ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर कानूनी साक्षरता शिविर, महिला सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम और छात्र संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे। पुनीत कुमार ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति को यह जानना जरूरी है कि उसके पास मुफ्त कानूनी सहायता का अधिकार है, और जरूरत पड़ने पर वह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से सहायता प्राप्त कर सकता है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य सुनील नेगी ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें सामाजिक उत्तरदायित्व का बोध कराने में अत्यंत सहायक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे कानून को केवल नियमों के रूप में न देखें, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था के रूप में समझें जो उनके अधिकारों की रक्षा करती है।इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकगण, अभिभावक समिति के सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में बच्चों ने *“सशक्त बालक, सशक्त भारत”* का नारा लगाते हुए विधिक जागरूकता और सुरक्षित जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया। इस प्रकार यह विधिक शिविर न केवल छात्रों के लिए ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ, बल्कि समाज में विधिक चेतना फैलाने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में उभरा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की यह मुहिम पर्वतीय क्षेत्रों में न्याय, जागरूकता और अधिकारों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए निरंतर जारी है।


