उत्तराखंड

ज्यूड़ा गांव के चार मकान जमींदोह 3 अशंकित नुकशान

नारायण बागड़ विकास नारायणबगड का मामला

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(के ऐस असवाल

नारायणबगड़ ।      क्षेत्र में बारिश का कहर लगातार जारी है। शुक्रवार रात को भारी बारिश के दौरान विकास खण्ड के सुदूरवर्ती ज्यूडा़ गांव में हुए भूस्खलन से चार मकानें जमींदोज हो गई और तीन मकानों को आंशिक रूप से क्षति पहुंची है। ग्रामीणों की सतर्कता से जानमाल का नुकसान होने से बच गया। लेकिन घटना को लेकर ग्रामीण दहशत में हैं।

जनकारी के अनुसार ज्यूड़ी गांव  के बलवंत सिंह रौतेला ने बताया कि शुक्रवार रात करीब एक बजे मूसलाधार बारिश के दौरान बादलों की तेज गडगड़ाहट की आवाज़ के बाद जमीन हिलने लगी तो गांव वालों में जाग हो गई। और लोग खतरे की आशंका को देखते हुए सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे। इस बीच गांव के सुरेशानंद की मकान के आगे से हुए जबरदस्त भूस्खलन से गांव के रविदत्त, बलराम, हंसराम और महेशानंद की मकानें जमींदोज हो गई हैं। जबकि गबरसिंह,रणजीत सिंह, त्रिलोकसिंह,की मकानों के पीछे मलबा भर जाने से मकानों की दीवारों में दरारें आ गई हैं । बताया कि ग्रामीणों की सजग रहने से जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। अलबत्ता लोगों की पुश्तैनी मकानें अतिवृष्टि की भेंट चढ़ गई। प्रधान पूनम देवी ने बताया कि गांव में अतिवृष्टि के कारण हुए नुकसान की सूचना उन्होंनेतत्काल ही दे दी थी। सूचना मिलते ही शनिवार सुबह ब्लॉक प्रमुख गणेश चंदोला, जिपंस प्रदीप बुटोला, तहसीलदार दिगंबर सिंह नेगी, राजस्व उपनिरीक्षक मनीषा कुंवर, रोशन रोधियाल ज्यूडा़ गांव पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से क्षति के बारे में जानकारी ली और उसका आंकलन किया। ज्यूडा़ गांव से कुछ ही दूरी पर स्थित मैदुनी गांव में भी अतिवृष्टि से संपर्क मार्ग, पैदल पुलिया और खेती को काफी नुकसान पहुंचा है। ग्राम प्रधान देवेश्वरी देवी ने बताया कि गांव के गोशाला गधेरे में आई बाढ़ से गांव की लगभग35नाली खेती की भूमि फसल समेत बर्बाद हो गई है। गांव की एक पैदल पुलिया और सभी संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए हैं।और गांव की गोशालाओं को गधेरे के कटाव से खतरा बना हुआ है। राजस्व विभाग की टीम ने मैदुनी गांव का दौरा कर अतिवृष्टि के कारण हुए नुकसान का जायजा लिया।

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