पोक्सो एक्ट में दोष सिद्ध, अभियुक्त को 20 वर्ष का कठोर कारावास व जुर्माना

चमोली (गोपीश्वर)।
जनपद चमोली के गोपीश्वर स्थित विशेष सत्र न्यायालय (पोक्सो) ने एक बहुचर्चित आपराधिक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए अभियुक्त राजेन्द्र सिंह उर्फ राजू को पोक्सो अधिनियम के अंतर्गत दोषी करार दिया है। न्यायालय ने अभियुक्त को 20 वर्ष के कठोर कारावास तथा 20 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त सजा भुगतने का भी प्रावधान किया गया है।
यह फैसला विशेष सत्र परीक्षण संख्या 14/2020 में पारित किया गया, जिसमें राज्य बनाम राजेन्द्र सिंह उर्फ राजू एवं अन्य अभियुक्तों के विरुद्ध मुकदमा विचाराधीन था। मामले की सुनवाई विशेष सत्र न्यायाधीश, जिला चमोली (गोपीश्वर) की अदालत में हुई। न्यायालय ने साक्ष्यों, गवाहों के बयानों तथा चिकित्सकीय प्रमाणों के आधार पर अभियुक्त राजेन्द्र सिंह को पोक्सो अधिनियम की धारा 5/6 के तहत दोषी पाया। वहीं, भारतीय दंड संहिता की धारा 302 एवं 201 के आरोपों में न्यायालय ने अभियुक्त को दोषमुक्त किया।
मामले का संक्षिप्त विवरण
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता की गुमशुदगी की रिपोर्ट मई 2020 में दर्ज कराई गई थी। पीड़िता की तलाश के दौरान 25 मई 2020 को उसका शव जंगल क्षेत्र में एक पेड़ से लटका हुआ बरामद हुआ। घटना की सूचना मिलते ही राजस्व पुलिस एवं बाद में नियमित पुलिस द्वारा मामले की गहन जांच की गई। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि अभियुक्त राजेन्द्र सिंह उर्फ राजू का पीड़िता के साथ पूर्व से संबंध था और पीड़िता नाबालिग थी।
जांच एजेंसी ने साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ पोक्सो अधिनियम के तहत आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। मामले में अन्य सह-अभियुक्तों के विरुद्ध भी आरोप लगाए गए थे, जिनका परीक्षण अलग-अलग साक्ष्यों के आधार पर किया गया।
अदालत में पेश हुए साक्ष्य
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 13 गवाहों को परीक्षित कराया गया। इनमें वादी, प्रत्यक्षदर्शी, पंच गवाह, पुलिस अधिकारी तथा चिकित्सक शामिल रहे। चिकित्सकीय साक्ष्यों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को विशेष महत्व दिया गया, जिसमें मृत्यु का कारण दम घुटने (अस्फिक्सिया) बताया गया। इसके अतिरिक्त घटनास्थल से बरामद सामग्री, कपड़े, रस्सी/चुन्नी तथा अन्य भौतिक साक्ष्य भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
अभियुक्त पक्ष ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए आरोपों से इंकार किया तथा बचाव में साक्ष्य भी प्रस्तुत किए। हालांकि न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि अभियुक्त द्वारा नाबालिग पीड़िता के साथ गंभीर यौन अपराध किया गया, जो पोक्सो अधिनियम की परिधि में आता है।
न्यायालय की टिप्पणी
न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि पोक्सो अधिनियम का उद्देश्य नाबालिग बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण प्रदान करना है और ऐसे मामलों में कठोर दंड का प्रावधान समाज में निवारक प्रभाव डालने के लिए आवश्यक है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़िता की आयु, परिस्थितिजन्य साक्ष्य तथा चिकित्सकीय प्रमाण अभियोजन पक्ष के कथन की पुष्टि करते हैं। अदालत ने सजा सुनाते समय यह भी निर्देश दिया कि अभियुक्त द्वारा विचाराधीन अवधि में जेल में बिताई गई अवधि का लाभ धारा 428 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत दिया जाएगा।
अन्य अभियुक्त दोषमुक्त
मामले में नामजद अन्य सह-अभियुक्तों—मंगल सिंह, धनुली देवी, योगेन्द्र सिंह, नरेंद्र सिंह एवं वीरेंद्र सिंह—के विरुद्ध लगाए गए आरोप न्यायालय में सिद्ध नहीं हो सके। साक्ष्यों के अभाव में न्यायालय ने इन सभी सह-अभियुक्तों को दोषमुक्त कर दिया।
समाज में संदेश
इस निर्णय को क्षेत्र में न्यायिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। कानूनी जानकारों का कहना है कि पोक्सो अधिनियम के अंतर्गत दिए गए इस तरह के फैसले समाज में बच्चों के प्रति होने वाले अपराधों के विरुद्ध सशक्त संदेश देते हैं। पीड़िता पक्ष ने निर्णय पर संतोष व्यक्त करते हुए न्यायालय का आभार जताया है।न्यायालय के इस फैसले के बाद अभियुक्त को सजा भुगतने हेतु जेल भेज दिया गया है। मामले को लेकर क्षेत्र में व्यापक चर्चा है और इसे बाल संरक्षण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है
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मामल तथ्य (Case Facts)
अभियोजन के अनुसार, यह मामला जनपद चमोली के अंतर्गत वर्ष 2020 का है। वादी मुकदमा श्री सोबन सिंह द्वारा दिनांक 30 मई 2020 को राजस्व पुलिस क्षेत्र नंदप्रयाग/नालधूरा, तहसील थराली में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के माध्यम से दर्ज कराया गया था। वादी ने बताया कि उसकी नाबालिग पुत्री जानकी देवी (नाम परिवर्तित) का विवाह लगभग 6–7 माह पूर्व अभियुक्त राजेन्द्र सिंह उर्फ राजू से हुआ था।
वादी के अनुसार, दिनांक 21 मई 2020 को उसकी पुत्री अचानक घर से लापता हो गई। परिजनों द्वारा गांव, जंगल, नदी किनारे एवं आसपास के क्षेत्रों में काफी तलाश की गई, किंतु उसका कोई पता नहीं चल पाया। अंततः दिनांक 25 मई 2020 को गांव के समीप भड़कीयाधार जंगल में एक पेड़ से लटका हुआ पीड़िता का शव बरामद हुआ।शव मिलने की सूचना पर राजस्व पुलिस एवं प्रशासन मौके पर पहुंचा। पंचनामा एवं आवश्यक विधिक कार्यवाही के पश्चात शव को पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, कर्णप्रयाग भेजा गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पीड़िता की मृत्यु का कारण दम घुटना (Asphyxia) पाया गया।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पीड़िता की उम्र घटना के समय 18 वर्ष से कम थी। हाईस्कूल प्रमाण पत्र एवं अन्य शैक्षणिक अभिलेखों के आधार पर पीड़िता को नाबालिग सिद्ध किया गया। अभियोजन का यह भी आरोप रहा कि अभियुक्त राजेन्द्र सिंह ने पीड़िता को बहला-फुसलाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, जिससे वह गर्भवती हो गई थी और बाद में उसे प्रताड़ित किया गया।
अभियोजन के अनुसार, अभियुक्त द्वारा पीड़िता के साथ किया गया कृत्य पोक्सो अधिनियम की धारा 5/6 के अंतर्गत गंभीर यौन अपराध की श्रेणी में आता है। मामले में अभियुक्त के परिजनों पर भी साक्ष्य मिटाने एवं अपराध में सहयोग करने के आरोप लगाए गए थे।
मामले की विवेचना पूर्ण होने के बाद पुलिस द्वारा अभियुक्त राजेन्द्र सिंह उर्फ राजू के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 201 एवं 120-बी तथा पोक्सो अधिनियम की धारा 5/6 के अंतर्गत आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अन्य सह-अभियुक्तों के विरुद्ध भी आरोप पत्र दाखिल किया गया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 13 गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया गया, जिनमें वादी, ग्रामीण साक्षी, चिकित्सक, राजस्व एवं पुलिस अधिकारी शामिल रहे। अभियोजन द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल का नक्शा, जब्ती मेमो, पीड़िता के वस्त्र, चुन्नी तथा अन्य भौतिक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
अभियुक्त पक्ष ने अपने बचाव में आरोपों से इंकार करते हुए कहा कि पीड़िता ने आत्महत्या की है तथा उसे झूठे मामले में फंसाया गया है। हालांकि न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि अभियुक्त द्वारा नाबालिग पीड़िता के साथ गंभीर यौन अपराध किया गया है।
न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि अभियोजन यह सिद्ध करने में सफल रहा कि पीड़िता नाबालिग थी और अभियुक्त का कृत्य पोक्सो अधिनियम के अंतर्गत दंडनीय है। अतः न्यायालय ने अभियुक्त राजेन्द्र सिंह उर्फ राजू को पोक्सो अधिनियम की धारा 5/6 में दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष का कठोर कारावास एवं 20,000 रुपये का जुर्माना की सजा सुनाई। वहीं अन्य सह-अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप सिद्ध न होने पर उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया।


