मानव–वन्यजीव संघर्ष रोकने की दिशा में वन विभाग की पहल, प्रत्येक रेंज को मिला पिंजरा
चमोली, / महावीर सिंह रावत*
जनपद चमोली में बढ़ते मानव–वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल की है। बद्रीनाथ वन प्रभाग के अंतर्गत प्रत्येक वन रेंज को एक-एक पिंजरा उपलब्ध करा दिया गया है। यह जानकारी बद्रीनाथ वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) सर्वेश कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि बद्रीनाथ एवं केदारनाथ वन प्रभाग की सभी रेंजों में पिंजरे उपलब्ध करा दिए गए हैं। जनपद चमोली की कुल 10 रेंजों में 10 पिंजरे दिए गए हैं, जो मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने में प्रभावी सिद्ध होंगे।
डीएफओ सर्वेश कुमार ने बताया कि किसी भी क्षेत्र से वन्यजीव के आबादी क्षेत्र में आने या आक्रामक होने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम पिंजरे के साथ मौके पर पहुंचेगी। स्थिति के अनुसार वन्यजीव को सुरक्षित रूप से पिंजरे में पकड़कर जंगल क्षेत्र में छोड़ा जाएगा या अन्य सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा। इससे जहां एक ओर मानव जीवन की रक्षा होगी, वहीं दूसरी ओर वन्यजीवों को भी नुकसान से बचाया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था विशेष रूप से उन वन्यजीवों के लिए उपयोगी साबित होगी, जो बार-बार आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं और आक्रामक व्यवहार कर रहे हैं। पिंजरों की उपलब्धता से त्वरित कार्रवाई संभव होगी, जिससे समय रहते घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।गौरतलब है कि जनपद चमोली में बीते कुछ महीनों से मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। खासकर भालू और तेंदुए की सक्रियता ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में वन विभाग की यह पहल लोगों के लिए राहत का संदेश लेकर आई है।
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि किसी भी वन्यजीव की गतिविधि की जानकारी तुरंत विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
*इनसेट–1 : हालिया भालू हमले**
नवंबर–दिसंबर 2024 के दौरान जनपद चमोली के विभिन्न क्षेत्रों में भालू के कई हमले सामने आए हैं। नंदानगर क्षेत्र के सागवाड़ा गांव में भालू ने एक व्यक्ति पर हमला कर उसे बुरी तरह घायल कर दिया था। इसके अलावा जनपद के अन्य क्षेत्रों में भी भालू के हमलों की घटनाएं दर्ज की गई हैं। पोखरी क्षेत्र में तो भालू स्कूल परिसर में ही घुस गया था और एक स्कूली बच्चे को उठाकर ले गया। गनीमत रही कि अन्य छात्रों की सतर्कता और शोरगुल के चलते बच्चा भालू के चंगुल से बच पाया। इन घटनाओं ने मानव–वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को उजागर किया है।
*इनसेट–2 : तेंदुए की बढ़ती सक्रियता*
ग्रामीण क्षेत्रों में तेंदुए की लगातार सक्रियता भी चिंता का विषय बनी हुई है। कई इलाकों में तेंदुआ आबादी के नजदीक देखा गया है और पालतू जानवरों पर हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिस कारण मानव और तेंदुए के बीच संघर्ष की घटनाएं कई स्थानों पर देखने को मिल रही हैं। पिंजरों की उपलब्धता से अब ऐसे तेंदुओं को सुरक्षित तरीके से पकड़ने और स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।


