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लार्ड कर्जन रोड अब “नंदा–सुनंदा परिपथ” के नाम से जाना जाएगा।

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—–ब्रिटिश शासन काल में उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में बना यह पैदल ट्रैक वायसराय लार्ड कर्जन के नाम से जाना जाता था।

—–200 किमी का है पैदल हिमालयी पथ।

रमेश चंद्र थपलियाल  /  चमोली –

दुनिया के खूबसूरत हिमालयी पैदल ट्रैकों में शामिल उत्तराखंड का 200 किलोमीटर लंबा, प्रकृति के मनोहारी नजारों और साहसिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध लार्ड कर्जन रोड अब हिमालय की आराध्य देवी नंदा–सुनंदा के नाम से जाना जाएगा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दुनिया भर के ट्रैकर्स और देवभूमि उत्तराखंड के लोगों को यह नामकरण का तोहफा दिया है। बता दे कि मुख्यमंत्री धामी ने इस पथ को नंदा सुनंदा नाम हाल ही में अपने चमोली भृमण के दौरान की थी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा करते हुए कहा कि लार्ड कर्जन रोड का नाम अब नंदा–सुनंदा परिपथ होगा। लार्ड कर्जन रोड का नाम हिमालय की आराध्य देवी नंदा–सुनंदा के नाम पर किए जाने से उत्तराखंड के लोगों और इस ट्रैक पर ट्रेकिंग करने वाले हिमालयी ट्रैकर्स में उत्साह है। हिमालयी प्रकृति और संस्कृति के यायावर विजय रौतेला जो बीते 20 वर्षों में 10 बार लार्ड कर्जन रोड की पगडंडियां नाप चुके हैं, कहते हैं कि कर्जन रोड का नाम परिवर्तित कर “नंदा–सुनंदा परिपथ” किया जाना स्वागत योग्य कदम है।

उम्मीद की जानी चाहिए कि नाम परिवर्तन से इस पैदल मार्ग के भी दिन बहुरेंगे, जिससे न केवल पर्यटकों की आमद बढ़ेगी, अपितु यह गढ़वाल और कुमाऊं के पर्यटन की जीवंत पथरेखा बनकर उभरेगा। विजय रौतेला का कहना है कि नंदा–सुनंदा पथ जनपद चमोली के पांच ब्लॉक—थराली, देवाल, नंदानगर, दशोली और ज्योतिर्मठ विकासखंड—के सुदूरवर्ती गांवों की लाइफलाइन और आर्थिकी का मजबूत जरिया बनेगा।

यह पैदल मार्ग स्थानीय गांवों की संस्कृति, हिमालय के बुग्यालों, पहाड़ों, नदियों की खूबसूरती और नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत दीदार कराता है। नंदा देवी राजजात की दृष्टि से भी यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे पर्यटन के मानचित्र पर समुचित स्थान देकर विकसित किया जाना चाहिए। यह मार्ग रहस्य, रोमांच और कौतूहल से भरा हुआ है।

125 साल पुराना ऐतिहासिक पैदल लार्ड कर्जन रोड भारत ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटकों और पथारोहियों की भी पहली पसंद रहा है। चमोली के पांच ब्लॉकों से गुजरने वाले इस मार्ग की दूरी लगभग 200 किलोमीटर है, जो थराली ब्लॉक के ग्वालदम से लेकर जोशीमठ ब्लॉक के तपोवन तक 50 से अधिक गांवों से होकर गुजरता है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह ट्रैक साल के 12 महीने पर्यटन की दृष्टि से बेहद मुफीद है। इस ट्रैक को खासतौर पर यूरोपीय देशों के पर्यटक बेहद पसंद करते हैं। हर साल न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी सहित विभिन्न देशों से लोग यहां का रुख करते हैं।

इस मार्ग का निर्माण ब्रिटिश भारत के वायसराय रहे लार्ड कर्जन ने करवाया था।

इतिहास बताता है कि लार्ड एल्गिन द्वितीय के बाद 1899 में लार्ड कर्जन भारत के वायसराय बने और 1905 में बंगाल विभाजन के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। भारत में अपने छह साल के कार्यकाल में कर्जन ने कई जनहित से जुड़े कार्य किए। पुलिस सुधार, शैक्षिक सुधार, आर्थिक सुधार, रेलवे का विकास, सैनिक सुधार और 1905 में भारतीय पुरातत्व विभाग की स्थापना भी कर्जन के कार्यकाल में हुई। लार्ड कर्जन प्रकृति प्रेमी भी थे और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने लगभग पूरे भारत का भ्रमण किया। इसी दौरान वे उत्तराखंड भी आए और उन्हें यहां के पहाड़ों की सुंदरता बेहद भायी। इसके बाद उन्होंने ग्वालदम से तपोवन तकम 200 किलोमीटर लंबे पैदल ट्रैक का निर्माण करवाया। वे स्वयं इस ट्रैक से यात्रा करना चाहते थे, लेकिन अचानक दिए गए इस्तीफे के बाद वे भारत से इंग्लैंड लौट गए। जिस ट्रैक का निर्माण उनके दिशा-निर्देशन में हुआ और जिस पर वे स्वयं चलना चाहते थे, वही ट्रैक लार्ड कर्जन रोड के नाम से जाना गया।

पर्यटकों की है पहली पसंद

यह पैदल मार्ग पर्यटकों की पहली पसंद है। कुमाऊं और गढ़वाल को जोड़ने वाले इस मार्ग का निर्माण ही पर्यटकों की आवाजाही के लिए किया गया था, ताकि पर्यटक इस रास्ते से होकर हिमालय के विविध नजारों का आनंद ले सकें। हिमालयी पर्यटक संजय चौहान, हीरा सिंह पहाड़ी और हीरा सिंह गढ़वाली कहते हैं कि हिमालय को करीब से जानने वालों के लिए यह मार्ग किसी रोमांच से कम नहीं है। रास्ते भर गांवों, बुग्यालों, तालों, पेड़ों, जंगली जानवरों, पक्षियों और पहाड़ की संस्कृति के दर्शन होते हैं। इस मार्ग से त्रिशूल, केदारनाथ, चौखंबा, नीलकंठ, कामेट, गौरी पर्वत, हाथी पर्वत, नंदा देवी, नंदा घुंघटी सहित हिमालय की कई पर्वत श्रेणियां दिखाई देती हैं। औली, गोरसों, सिम्बे बुग्याल, नरेला, बालपाटा, रामणी, आली जैसे मखमली बुग्याल, राज्य वृक्ष बुरांश, राज्य पक्षी मोनाल और राज्य पशु कस्तूरी मृग भी यहां देखे जा सकते हैं। इसके अलावा हजारों प्रकार के फूल और वनस्पतियां पर्यटकों को रोमांचित कर देती हैं।

उत्तराखंड में 12 वर्ष में आयोजित होने वाली नंदा देवी राजजात और वार्षिक लोकजात के दौरान देव डोलियां और छंतोलियां अधिकांश स्थानों पर इसी कर्जन रोड से होकर गुजरती हैं।

200 किमी पैदल लार्ड कर्जन रोड का नाम “नंदा–सुनंदा परिपथ” में परिवर्तित होने से इस पैदल मार्ग के भी दिन बहुरने की आस बढ़ गई है। इससे न केवल पर्यटकों की आमद बढ़ेगी, अपितु यह जनपद चमोली के पांच ब्लॉक—थराली, देवाल, नंदानगर, दशोली और ज्योतिर्मठ—के सुदूरवर्ती गांवों की लाइफलाइन और आर्थिकी का मजबूत आधार बनेगा।

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा अब लार्ड कर्जन रोड पर ग्वालदम से जोशीमठ तक सड़क निर्माण की कवायद शुरू कर दी गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए धनराशि भी आवंटित कर दी गई है। प्रस्तावित सड़क सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होगी, जिससे सेना और सुरक्षा बलों को आवाजाही में सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही यह सड़क आम जनता के लिए भी उपयोगी साबित होगी और बदरीनाथ धाम जाने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित होगी। सड़क का निर्माण सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा किया जाएगा। बीआरओ के अनुसार यह सड़क अधिकांश स्थानों पर पुराने लार्ड कर्जन मार्ग के अनुरूप ही बनाई जाएगी, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। सड़क निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों में खासा उत्साह है और उम्मीद की जा रही है कि इससे क्षेत्र के पर्यटन, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

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