सजा यापता जनपद नही बनने देंगे चमोली को
सजा के तोर पर भेजा जाता है चमोली व रुद्रप्रयाग लोग नाराज

महाबीर रावत/ चमोली
रुद्रपुर में सुखबिंदर सिंह की मौत के मामले में दोषी पुलिस कर्मियों को जनपद चमोली एवं रुद्रप्रयाग में तैनात किए जाने के आदेश पर दोनों जनपदों में तीखा विरोध सामने आया है। इस निर्णय को लेकर जनपदवासियों में भारी आक्रोश है और सोशल मीडिया पर सुबह से ही उबाल देखने को मिल रहा है।
उल्लेखनीय है कि सुखबिंदर सिंह की मौत प्रकरण में शामिल कुल 12 पुलिस कर्मियों को स्थानांतरण के तहत छह को चमोली और छह को रुद्रप्रयाग भेजे जाने के आदेश पुलिस महानिरीक्षक स्तर से जारी किए गए हैं। जैसे ही यह आदेश सार्वजनिक हुए, लोगों ने इसे जनपदों के साथ अन्याय करार दिया। नागरिकों का कहना है कि चमोली और रुद्रप्रयाग को “सजा जनपद” के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जो किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कॉग्रेस नगर व ब्लाक सगठन ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर उक्त सभी पुलिस कर्मियों को जिले न भेजे जाने कि बात कही है। भाजपा नेता नवीन भट्ट ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि इन जनपदों को सरकारी कर्मचारियों के लिए “सजा या पनाह जिला” बनाकर रखा गया है। उन्होंने कहा कि पहले से ही कई अधिकारी और कर्मचारी यहां दंड स्वरूप तैनात किए गए हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जनविश्वास दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
जनपदवासियों ने मांग की है कि दोषी कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, न कि उन्हें अन्य जिलों में भेजकर वहां की जनता पर बोझ डाला जाए। विरोध को देखते हुै। शुक्रवार को कॉग्रेस के कार्यकर्ता पुलिस उपाधीक्षक को कांग्रेसजनो द्वारा नगर/ब्लाक कांग्रेस के तत्वावधान में इस संवेदनशील मामले में स्थानांतरित पुलिस कर्मियों को जनपद चमोली में कार्यभार ग्रहण न कराने विषयक पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड को सम्बोधित ज्ञापन पुलिस अधीक्षक चमोली को सौंपा गया ।
ज्ञापन सौंपने वालों में नगर अध्यक्ष योगेंद्र बिष्ट, पीसीसी सदस्य अरविंद नेगी, प्रदेश प्रवक्ता ओमप्रकाश नेगी,बरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष आनंद सिंह पंवार, जिला उपाध्यक्ष धीरेन्द्र गरोडिया व बरिष्ठ कांग्रेसी मुकुल विष्ट आदि सामिल रहे। आनंद सिंह पंवार, जिला कांग्रेस मुख्यालय प्रभारी शामिल थे


