नंदा देवी की बड़ी जात व राजजात को लेकर बनी असमंजस बरकरार
चमोली –
हिमालय की अधिष्ठात्री मां नंदा देवी की मायके से ससुराल तक होने वाली ऐतिहासिक यात्रा को लेकर चमोली जिला मुख्यालय में बुधवार को जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी गौरव कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में नंदा देवी की बड़ी जात से जुड़े प्रतिनिधि, विभिन्न पड़ावों के हक-हकूकधारी और आस्था से जुड़े लोग शामिल हुए, जबकि नंदा देवी राजजात समिति के पदाधिकारी बैठक में उपस्थित नहीं रहे।
बैठक का उद्देश्य नंदा देवी की बड़ी जात और राजजात को लेकर बनी असमंजस की स्थिति में सभी पक्षों की राय और सुझाव लेना था। गौरतलब है कि बड़ी जात समिति ने इसी वर्ष यात्रा कराने की घोषणा की है, जबकि राजजात समिति ने अधिक मास और संभावित जोखिमों का हवाला देते हुए 2027 में आयोजन का पक्ष रखा है। बैठक में पहुंचे लोगों ने यात्रा को आस्था और सदियों पुरानी परंपराओं से जोड़ते हुए इसे तय समय पर कराने की बात कही। वहीं मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि और जिला पंचायत अध्यक्ष ने आस्था के साथ-साथ व्यवस्थाओं के सुदृढ़ होने को भी आवश्यक बताया। इस दौरान प्रशासनिक तैयारियों, मार्गों की स्थिति, आपदा के बाद के हालात और श्रद्धालुओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।कुरुड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र रावत ने कहा कि नंदा देवी की हिमालयी यात्रा की शुरुआत सिद्ध पीठ कुरुड़ से ही होनी चाहिए और इस यात्रा में राजनीति का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने यात्रा मार्गों को पर्यटन और शासन के मानचित्र में स्पष्ट रूप से दर्ज न किए जाने पर भी नाराजगी जताई। वरिष्ठ अधिवक्ता डीपी पुरोहित ने परंपराओं के अनुसार आयोजन पर जोर देते हुए कुरुड़ में नंदा देवी शिला की ऐतिहासिक महत्ता की बात कही।
मुख्यमंत्री के समन्वयक दलबीर सिंह दानू ने सरकार की ओर से सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि पड़ावों पर समितियों का गठन कर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी, हालांकि हालिया आपदाओं के कारण कुछ चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट ने मार्गों के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देने की बात कही। बैठक से पहले अलग-अलग राय लेने को लेकर कुछ लोगों ने नाराजगी जताई और हंगामा भी हुआ। इसके बावजूद बैठक में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे। अंततः प्रशासन ने सभी सुझावों को संकलित कर आगे की कार्यवाही के संकेत दिए। नंदा देवी की हिमालयी यात्रा को लेकर आस्था और व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की चुनौती फिलहाल शासन और प्रशासन के सामने बनी हुई है।



