चारधाम यात्रा 2026 से पूर्व बदरीनाथ हाईवे को चकाचक करना प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा
भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में ट्रीटमेंट कार्य जारी, डीएम के नेतृत्व में संयुक्त टीम करेगी स्थलीय निरीक्षण

, रमेश चंद्र थपलियाल/ चमोली
आगामी चारधाम यात्रा 2026 के शुभारंभ से पूर्व बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग को सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना जिला प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। उत्तराखण्ड शासन के स्पष्ट निर्देशों के बाद चमोली जिला प्रशासन, एनएचआईडीसीएल (NHIDCL) और सीमा सड़क संगठन (BRO) युद्धस्तर पर तैयारियों में जुटे हुए हैं।
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व बदरीनाथ हाईवे और हेमकुंड साहिब पैदल मार्ग को पूर्ण रूप से दुरुस्त करने के निर्देश संबंधित एजेंसियों को दे दिए गए हैं। शीघ्र ही जिलाधिकारी के नेतृत्व में पुलिस अधीक्षक, एनएचआईडीसीएल, बीआरओ और अन्य विभागीय अधिकारियों की संयुक्त टीम बदरीनाथ धाम पहुंचकर हाईवे की जमीनी स्थिति का विस्तृत निरीक्षण करेगी।
*प्रवेश द्वार से धाम तक निर्माण कार्यों की भरमार*
जिले के प्रवेश द्वार कमेड़ा से लेकर कंचन गंगा तक ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत चौड़ीकरण, सुधारीकरण और ट्रीटमेंट कार्य विभिन्न चरणों में जारी है। कई स्थानों पर पहाड़ी कटान और मलबा हटाने का कार्य प्रगति पर है।
हनुमान चट्टी से बदरीनाथ और माणा तक सड़क चौड़ीकरण की गति फिलहाल बर्फबारी के कारण अपेक्षाकृत धीमी है। हाईवे के दोनों ओर जमी बर्फ निर्माण कार्य में बाधा बन रही है। इसके बावजूद बीआरओ विषम परिस्थितियों में भी मार्ग को यातायात योग्य बनाए रखने में जुटा हुआ है। यह मार्ग सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीमा चौकियों तक आवागमन का मुख्य मार्ग है।
*भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में विशेष ट्रीटमेंट*
बदरीनाथ हाईवे के कमेड़ा, चटवा पीपल, पार्थाडीप (नंदप्रयाग), मैठाणा, क्षेत्रपाल, विरही, भनेरपानी, पागल नाला और बेलाकुची जैसे संवेदनशील स्थलों पर ट्रीटमेंट कार्य जारी है।
विशेष रूप से नंदप्रयाग के पार्थाडीप क्षेत्र में सड़क किनारे आए भारी मलबे को पूर्ण रूप से हटाकर ब्लैक टॉपिंग (डामरीकरण) करना अत्यंत आवश्यक है। जिलाधिकारी ने बताया कि जिन स्थानों पर चौड़ीकरण कार्य के कारण डामरीकरण अधूरा है, वहां शीघ्र ब्लैक टॉपिंग पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, जहां-जहां मलबा हाईवे पर आया है, उसे तत्काल हटाकर मार्ग को सुचारू रखने के आदेश जारी किए गए हैं।
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यात्रा काल में सुरक्षा प्रबंधन होगी सबसे बड़ी कसौटी
चारधाम यात्रा के दौरान बदरीनाथ हाईवे पर वाहनों का अत्यधिक दबाव रहता है। मैदानी क्षेत्रों से आने वाले अनेक वाहन चालक पर्वतीय मार्गों पर ड्राइविंग का सीमित अनुभव रखते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।प्रशासन के सामने संवेदनशील स्थलों का चिन्हीकरण कर वहां चेतावनी संकेतक, क्रैश बैरियर, पैराफिट वॉल और अन्य सुरक्षात्मक उपाय सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती होगी।
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बरसात में भूस्खलन से बार-बार बाधित होता है यातायात
मानसून के दौरान पहाड़ियों से अचानक बोल्डर और पत्थर गिरने, चट्टानें खिसकने तथा मलबा आने से यातायात कई घंटों से लेकर कई दिनों तक बाधित हो जाता है।ऐसे भूस्खलन संभावित स्थलों पर पर्याप्त संख्या में जेसीबी, पोकलैंड मशीनें और राहत दल तैनात रखना प्रशासन के लिए अनिवार्य होगा, ताकि यात्रा अवधि में मार्ग शीघ्र सुचारू किया जा सकता है ।
चारधाम यात्रा राज्य की आर्थिकी, पर्यटन और धार्मिक आस्था से सीधे जुड़ी है। ऐसे में बदरीनाथ हाईवे को सुरक्षित, व्यवस्थित और बाधारहित बनाना जिला प्रशासन के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। प्रशासन की तैयारियों पर अब यात्रियों और स्थानीय जनता की निगाहें टिकी हुई हैं।


