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जिला कारागार मै निरुद्व बंदियों व जेल कर्मियों को निशुल्क मेडिकल कैप का आयोजन किया

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चमोली –

जिला कारागार पुरसाड़ी में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निरुद्ध बंदियों एवं जेल कर्मियों के लिए निःशुल्क मेडिकल कैंप का आयोजन किया गया। यह चिकित्सा शिविर वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश तथा सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पुनीत कुमार की उपस्थिति में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्राधिकरण की यह पहल उन बंदियों के स्वास्थ्य संरक्षण एवं नियमित चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हो पातीं।

इस कैंप में इएनटी सर्जन दिग्विजय, फिजिशियन जगजीत गुहा तथा ईएमओ पंकज रावत की टीम द्वारा बंदियों का विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। चिकित्सकों ने शारीरिक, नेत्र, श्वसन, त्वचा, गला तथा सामान्य रोगों की जांच की और जरूरतमंद बंदियों को तत्काल प्राथमिक उपचार भी प्रदान किया। कैंप के दौरान **लगभग 80 बंदियों तथा महिला बंदियों का भी समुचित उपचार किया गया* और रोगों की परीक्षण हेतु 20 से अधिक के रक्त के नमूने/ सैंपल के रूप में परीक्षण हेतु लिए गए, जो इस पहल की व्यापकता और उपयोगिता को दर्शाता है। कई बंदियों को पुरानी बीमारियों के संबंध में चिकित्सा सलाह भी दी गई।

पैथोलॉजिस्ट विजय नेथवाल द्वारा बंदियों के रक्त के नमूने लिए गए, जिनमें हीमोग्लोबिन से लेकर इंफेक्शन, डायबिटीज, जिगर एवं गुर्दे संबंधी जांचें शामिल रहीं। डॉक्टरों ने बंदियों को नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की महत्ता समझाई और बताया कि समय पर जांच गंभीर बीमारियों को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाती है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव पुनीत कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य मानवाधिकार का अभिन्न हिस्सा है और बंदियों को भी यह अधिकार समान रूप से प्राप्त है। उन्होंने कहा कि न्याय तक पहुंचाने के साथ-साथ प्राधिकरण का दायित्व है कि समाज के हर वर्ग को आवश्यक सहायता व संरक्षण मिले। इसी उद्देश्य से समय-समय पर ऐसे शिविर आयोजित किए जाते हैं, ताकि बंदियों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

 

इस अवसर पर प्रतिरक्षा अधिवक्ता समीर बहुगुणा,  मोहन पंत,  व प्रभारी जेलर त्रिलोक चंद्र आर्य तथा फार्मासिस्ट सत्यपाल सिंह पाड़ियार भी उपस्थित रहे। अधिवक्ताओं ने बंदियों को विधिक अधिकारों एवं उपलब्ध कानूनी सहायता के बारे में अवगत कराया। जेल प्रशासन ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शिविर बंदियों के स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

फार्मासिस्ट सत्यपाल सिंह पाड़ियार ने बंदियों को आवश्यक दवाइयाँ वितरित कीं और उन्हें दवाइयों के सही उपयोग, समय पर सेवन तथा संभावित दुष्प्रभावों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। चिकित्सकीय टीम ने सुझाव दिया कि बंदियों को योग, प्राणायाम और हल्के व्यायाम के लिए भी प्रेरित किया जाए, जिससे उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य संतुलित बना रहे।

चिकित्सकों ने बताया कि कई बंदी लंबे समय से सामान्य जांच से वंचित थे, जिसके चलते सामान्य समस्याएँ भी गंभीर स्वरूप ले सकती थीं। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे शिविरों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

कुल मिलाकर, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित यह निःशुल्क चिकित्सा शिविर बंदियों और जेल कर्मियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ। इस आयोजन ने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया बल्कि बंदियों के मन में यह विश्वास भी जगाया कि समाज उनके कल्याण और अधिकारों के प्रति संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।

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