इस वर्ष होने वाली नंदा राजजात को स्थगित करने का निर्णय राजजात समिति ने लिया निर्णय
चमोली –
हिमालय की अधिष्ठात्री देवी मां नंदा देवी की इस वर्ष प्रस्तावित नंदा देवी राजजात को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय नंदा देवी राजजात समिति की रविवार को गोपेश्वर में आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुंवर ने की।
नंदा देवी राजजात समिति के महामंत्री भुवन नौटियाल ने बताया कि बैठक में नंदा देवी राजजात अध्ययन दल की रिपोर्ट और ज्योतिषीय गणनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इन तथ्यों के आधार पर इस वर्ष प्रस्तावित राजजात को स्थगित करने का प्रस्ताव पारित किया गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में अधिक मास (मलमास) के कारण नंदा नवमी 20 सितंबर 2026 को पड़ रही है। इस अवधि में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां तीर्थयात्रियों के लिए अत्यंत जोखिमपूर्ण हो सकती हैं। महामंत्री ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची कि प्रस्तावित 2026 की नंदा देवी राजजात का आयोजन इस समयावधि में करना उचित नहीं होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2026 की राजजात को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी।
बैठक में आगामी कार्ययोजना पर भी चर्चा की गई। तय किया गया कि आगामी बसंत पंचमी, 23 जनवरी को गढ़वाल के राजवंशी कांसुवा गांव स्थित मंदिर में परंपरानुसार मनौती की जाएगी। इसके बाद ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर नंदा देवी राजजात के भविष्य के कार्यक्रम और तिथियों की घोषणा की जाएगी।
बैठक में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि नंदा देवी राजजात के भव्य और सुरक्षित आयोजन के लिए कुंभ प्राधिकरण की तर्ज पर एक पृथक राजजात प्राधिकरण का गठन किया जाए। यह प्राधिकरण 12 वर्षों के अंतराल के दौरान योजनाबद्ध रूप से कार्य करेगा ताकि अंतिम समय में किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यह प्राधिकरण धार्मिक अनुष्ठानों और परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं करेगा और पूजा-पाठ व परंपराओं का अधिकार पूर्व की भांति कांसुवा के राजकुंवरों और खाडू के पास रहेगा। बैठक में यात्रा के लिए प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने पर भी सहमति बनी। प्रस्ताव में कहा गया कि तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी और जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समितियों का गठन किया जाए, जिनमें मंदिर समितियों, हक-हकूकधारियों और जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।
राजजात से जुड़े आधारभूत ढांचे और वित्तीय आवश्यकताओं पर भी चर्चा की गई। बैठक में भारत सरकार से बजट वर्ष 2026-27 में श्री नंदा देवी राजजात के लिए बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के विकास हेतु विशेष आर्थिक पैकेज स्वीकृत करने का अनुरोध किया गया। साथ ही उत्तराखंड सरकार से आग्रह किया गया कि आगामी बजट में राजजात से संबंधित परियोजनाओं के लिए पर्याप्त धनराशि का प्रावधान किया जाए और बजट में नंदा देवी राजजात मद का स्थायी सृजन किया जाए।
इसके अलावा राजजात मार्गों के सुदृढ़ीकरण के लिए यात्रा से जुड़े जिलों की जिला योजनाओं में भी नंदा देवी राजजात मद बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि मार्गों का सुधार कार्य प्रतिवर्ष किया जा सके। शासन स्तर से नंदा देवी राजजात का एक आधिकारिक संयुक्त नक्शा जारी करने की आवश्यकता भी बैठक में रखी गई ।बैठक में यह सुझाव भी दिया गया कि बधाण क्षेत्र में मां नंदा देवी से जुड़े सभी पड़ावों को आधिकारिक पड़ाव घोषित किया जाए तथा देवराड़ा और कुरुड़ को पर्यटन विभाग के मानचित्र में शामिल किया जाए। साथ ही राजजात में शामिल होने वाली सभी डोलियों और यात्रियों के लिए सहायक मार्गों और पड़ावों पर शौचालय, विश्राम गृह जैसी आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाए।
बैठक में नंदा देवी राजजात समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुंवर, महामंत्री भुवन नौटियाल, पृथ्वी राज सिंह, डी डी कुनियाल, सुशील रावत, जय विक्रम सिंह कुंवर, महानंद मैठाणा सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। समिति ने कहा कि यह निर्णय परंपरा, श्रद्धा और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि भविष्य में नंदा देवी राजजात का आयोजन अधिक सुव्यवस्थित और सुरक्षित रूप में किया जा सके।


