थराली को जिला बनाने की मांग तेज, ब्लॉक सभागार में हुंकार; तहसील तक जुलूस निकाल सौंपा ज्ञापन

थराली।
विधानसभा क्षेत्र 05 थराली को पृथक जिला घोषित किए जाने की मांग को लेकर सोमवार को ब्लॉक सभागार में व्यापक बैठक आयोजित की गई। विधानसभा थराली बौद्धिक जागरण विकास मंच के आह्वान पर आयोजित इस बैठक में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, पूर्व जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में जागरूक नागरिक उपस्थित रहे। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि थराली की भौगोलिक परिस्थितियां, सीमांत स्थिति और प्रशासनिक दूरी को देखते हुए अब जिला गठन का निर्णय टाला नहीं जाना चाहिए।
बैठक के उपरांत सभी प्रतिभागी जुलूस की शक्ल में तहसील परिसर पहुंचे और उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में थराली की दीर्घकालिक मांग, पूर्व में हुए आंदोलनों और वर्तमान में क्षेत्र की प्रशासनिक समस्याओं का विस्तार से उल्लेख किया गया।
मंच के अध्यक्ष एवं पूर्व प्रमुख बख्ताबर सिंह नेगी ने कहा कि थराली लंबे समय से उपेक्षा का दंश झेल रहा है। जिला मुख्यालय से दूरी के कारण आम जनता को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी कई घंटों की यात्रा करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि पृथक जिला बनने से विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होगा और युवाओं को स्थानीय स्तर पर अवसर मिलेंगे। मंच के उपाध्यक्ष डीडी उनियाल ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 1985 से लेकर अब तक थराली की जनता लगातार आवाज उठाती रही है, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिले हैं। उन्होंने कहा कि यह मांग किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि समूचे क्षेत्र की भावनाओं से जुड़ी है। यदि सरकार वास्तव में पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास के लिए प्रतिबद्ध है, तो थराली को जिला बनाना एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय होगा।
प्रधान प्रद्युम्न सिंह रावत ने कहा कि दूरस्थ गांवों के लोगों को प्रशासनिक एवं स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जिला बनने से शासन-प्रशासन की पहुंच अंतिम छोर तक सुनिश्चित होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई गति आएगी। उन्होंने सभी से इस जनआंदोलन को शांतिपूर्ण और संगठित रूप से आगे बढ़ाने का आह्वान किया।पूर्व जिला पंचायत सदस्य नंदन सिंह रावत ने कहा कि थराली भौगोलिक रूप से विशाल क्षेत्र है और यहां की समस्याएं अलग प्रकृति की हैं। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्र होने के कारण यहां विशेष प्रशासनिक व्यवस्था की आवश्यकता है। जिला गठन से योजनाओं की निगरानी बेहतर होगी और स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया सशक्त बनेगी। इस अवसर पर मोहन लाल आर्य, दिनेश मिश्रा, राधा बल्लभ देवराड़ी, मुन्ना राम, जगदीश प्रसाद भारद्वाज, भूधर नेगी, हीरा सिंह रूपकुंडी, हरेन्द्र सिंह रावत सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग करते हुए संघर्ष को जारी रखने का संकल्प लिया।


