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महाशिवरात्रि पर रुद्र महोत्सव ने रचा आध्यात्मिक उल्लास

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चमोली –

भगवान शंकर की तपोभूमि गोपीनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित “रुद्र महोत्सव”ने पूरे नगर को शिवमय बना दिया। हजारों की संख्या में उमड़े शिवभक्तों ने भगवान गोपीनाथ के दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर भक्ति, आस्था और लोकसंस्कृति के रंगों से सराबोर नजर आया।

प्रातः 4 बजे पवित्र वैतरणी सरोवर के जल से भगवान गोपीनाथ का विशेष अभिषेक किया गया। स्थान ध्यान के उपरांत विधि-विधान से पूजा संपन्न हुई। तड़के 3 बजे से ही श्रद्धालु आस्था पथ और मंदिर परिसर में कतारबद्ध होकर दर्शन के लिए प्रतीक्षा करते दिखाई दिए।

रुद्र महोत्सव का शुभारंभ स्वस्ति वाचन और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नगर पालिका अध्यक्ष संदीप रावत द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत रुद्रीपाठ से हुई, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया ।गोपेश्वर गाँव की महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में शिव वंदना और अर्चना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की। अक्षत नाट्य संस्था के कलाकारों ने मांगल गीत, शिव बारात, हिमालय-शिव संवाद, पार्वती-विवाह और श्रीगणेश सहित देवी-देवताओं के महात्म्य का प्रभावशाली मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने हिमालय की अधिष्ठात्री माँ नन्दा की डोली और छंतोली का प्रतीकात्मक प्रदर्शन कर सांस्कृतिक गरिमा को और ऊँचा किया। धार्मिक आख्यानों, श्लोकों और ईश्वरीय वंदना से पूरा परिसर रुद्रमय वातावरण में डूबा रहा।

रुद्र महोत्सव में गोपीनाथ मंदिर से जुड़े गूंठ गाँवों एवं छ: ज्यूला गाँवों की महिलाओं और ग्रामीणों ने फलों की डलियाँ व वस्त्र अर्पित कर भगवान का पूजन किया। मंदिर प्रबंधन समिति ने मुख्य अतिथि एवं ग्राम प्रतिनिधियों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। महोत्सव में जिला जज विंध्याचल सिंह सहित न्यायाधीशों और न्यायिक मजिस्ट्रेटों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।महाशिवरात्रि पर मंदिर को हजारों पुष्पों से सजाया गया। चार प्रहर की विशेष पूजा, रुद्रीपाठ, शिव महिम्न स्तोत्र और आदि गुरु शंकराचार्य व पुराणों में वर्णित मंत्रोच्चार के साथ रात्रि जागरण संपन्न हुआ। सोमवार प्रातः 3 बजे तक श्रद्धालु भक्ति में लीन रहे। रुद्र महोत्सव ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि गोपेश्वर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत आज भी जनमानस को आस्था के सूत्र में बांधे हुए है। महाशिवरात्रि का यह दिव्य आयोजन श्रद्धा, संस्कृति और सामूहिक सहभागिता का अद्वितीय उदाहरण बन गया।

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