चमोली से अच्छी खबर: अलकनंदा के तट से लेकर सेना के कैंपों तक छाया योग, 11 हजार से अधिक लोगों ने बनाई सेहत

चमोली-
देवभूमि उत्तराखंड के सीमांत जिले चमोली से सेहत और सकारात्मकता से भरी एक बेहद खूबसूरत खबर सामने आई है। आयुष विभाग जिला चमोली के सौजन्य से पिछले एक महीने से चल रहा योग का महा-अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस अभियान ने चमोली के दूरस्थ गांवों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक, हर जगह लोगों को निरोग रहने का एक नया मंत्र दे दिया है।
🏔️ नदी के तट पर ‘हरित योग’ और सेना के जवानों का जोश
इस एक महीने के भीतर चमोली जिले में योग के कई अनोखे रंग देखने को मिले। अभियान की सबसे खूबसूरत तस्वीर अलकनंदा नदी के पावन तट पर दिखी, जहाँ ‘हरित योग’ के माध्यम से प्रकृति के बीच लोगों ने प्राणायाम किया।
इसके अलावा, देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सेना के जवानों और अफसरों के लिए विशेष योग सत्र आयोजित किए गए, जिसमें जवानों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। दफ्तरों में काम के तनाव को कम करने के लिए शासकीय कार्यालयों में ‘योग ब्रेक कार्यक्रम’ भी चलाए गए।
📊 चमोली ने बनाए शानदार आंकड़े
इस अभियान की सफलता को इन आंकड़ों से आसानी से समझा जा सकता है:
550 से ज्यादा अलग-अलग योग सत्र आयोजित किए गए।
11,150 से अधिक चमोली वासियों ने इस अभियान से जुड़कर अपनी सेहत सुधारी।
350 से अधिक सत्रों के वीडियो और फोटो आयुष उत्तराखंड की IDY ऐप पर भी अपलोड किए गए हैं, जिन्हें कोई भी देख सकता है।
🎙️ पूरे राज्य में बढ़ा चमोली का गौरव
मीडिया समन्वयक डॉक्टर हिमांशु डिमरी ने इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का योग से जुड़ना यह दिखाता है कि चमोली में स्वास्थ्य के प्रति एक नई अलख जगी है। इस शानदार उपलब्धि से चमोली जिले का मान पूरे उत्तराखंड राज्य में बढ़ा है। उन्होंने इस अभियान को घर-घर पहुँचाने के लिए सभी प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों (जैसे अमर उजाला, दैनिक जागरण, डीडी न्यूज आदि) का दिल से आभार जताया।
वहीं, जिला आयुर्वेद अधिकारी श्री श्रवण त्रिपाठी ने इस योग महोत्सव को ऐतिहासिक बनाने के लिए आयुष विभाग के ग्राउंड स्टाफ, डॉक्टरों और योग ट्रेनर्स की पीठ थपथपाई है, जिनकी दिन-रात की मेहनत से यह मुकाम हासिल हुआ।
बड़ी बात: चमोली आयुष विभाग के इस प्रयास ने साबित कर दिया है कि अगर सही दिशा में कदम बढ़ाए जाएं, तो योग को सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा बनाया जा सकता है।



