उत्तराखंड

ट्रीटमेंट कार्यों मे घोर अनियमितता, गुणवत्ता मानको के उल्लंघन की उच्च स्तरीय तकनीकी जाँच की उठ रही है मांग

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ज्योतिर्मठ।

जोशीमठ भू धसाव के बाद शुरू किए गए ट्रीटमेंट कार्यों को लेकर भू धसाव प्रभावित नगरवासी मुखर होने लगे है। ट्रीटमेंट कार्यों मे घोर अनियमितता, गुणवत्ता मानको के उल्लंघन की उच्च स्तरीय तकनीकी जाँच कराने व जाँच पूरी होने तक सम्बंधित फर्मों व ठेकेदारों के भुगतान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।

एसडीएम ज्योतिर्मठ के माध्यम से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजे ज्ञापन मे जोशीमठ को बचाने के लिए 1,640करोड़ की धनराशि जारी करने के लिए आभार व्यक्त करते हुए धनराशि का सही उपयोग हो इसके लिए प्रभावित प्रतिनिधियों को सम्मलित करते हुए उच्च स्तरीय तकनीकी कमेटी का गठन नितांत आवश्यक है, जिसकी मांग पूर्व मे भी की जाती रही है।

 

 

 

ज्ञापन मे कहा गया है कि जोशीमठ सामरिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र है। संपूर्ण राष्ट्र यहाँ की गंभीर स्थिति और आपदा प्रबंधन के अंतर्गत आवंटित जन-धन के सही उपयोग को लेकर संवेदनशील है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत इस अति-महत्वकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य जनता के जीवन, परिसंपत्तियों और इस ऐतिहासिक व धार्मिक नगर के अस्तित्व की रक्षा करना है,लेकिन वर्तमान में धरातल पर चल रहे कार्यों में व्यापक पैमाने पर अनियमितताएँ, तकनीकी लापरवाही और निर्धारित गुणवत्ता मानकों का गंभीर उल्लंघन देखा जा रहा है, माइक्रो-पाइलिंग एंकरिंग/सोइल नेलिंग व ड्रेनेज प्रबंधन में प्रयुक्त सामग्री मानकों के अनुरूप नहीं पाई जा रही है। स्वीकृत डीपीआर का स्पष्ट उल्लंघन देखा जा रहा है। ज्ञापन मे कहा गया है कि भू-तकनीकी दृष्टि से अति-संवेदनशील इस क्षेत्र में गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों के कारण भविष्य में पुनः विशाल आपदा और भू-धंसाव की आशंका बढ़ गई है, जिससे स्थानीय निवासियों के जीवन पर पुनः गंभीर संकट मंडरा रहा है, और बिना किसी पारदर्शी गुणवत्ता जाँच और निष्पक्ष थर्ड-पार्टी ऑडिट के ही कार्यदायी संस्थाओं एवं ठेकेदारों को भुगतान को किया जा रहा है जो सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का प्रत्यक्ष उदाहरण है।

ज्ञापन मे जाँच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, तकनीकी निरीक्षकों एवं संबंधित ठेकेदारों के विरुद्ध सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई किए जाने तथा घटिया कार्यों को ठेकेदारों की लागत पर पुनः सही मानकों के अनुसार करवाने के निर्देश दिए जाएं, साथ ही जोशीमठ के स्थिरीकरण के लिए किए जाने वाले ड्रेनेज सीवेज व्यवस्था में सम्पूर्ण जोशीमठ नगर को शामिल करते हुए इसके लिए आवंटित बजट को बढ़ाया जाये  l ज्ञापन मे प्रभावितों के सम्पूर्ण पुनर्वास को प्राथमिकता देते हुए इसे शीघ्रता से किया जाए। मुआवजा भुगतान व प्रभावितों को बसाने के कार्यों को लेकर शिथिलता बरतने को गंभीरता से लिया जाए ।

जोशीमठ के लिए आईआईटी रुड़की द्वारा डिज़ाइन किए गए भवन निर्माण स्ट्रक्चर को मंजूरी देते हुए इसे लागू करने के निर्देश शीघ्र दिए जाएं जिससे प्रभावित अपने लिए घरों का निर्माण कर सकें । ज्ञापन की प्रति मुख्य सचिव उत्तराखंड,सचिव आपदा प्रबंधन, जिलाधिकारी चमोली को भी प्रेषित की गई है। ज्ञापन देने वालों मे जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती, प्रवक्ता कमल रतूड़ी, उक्रांद के बरिष्ठ नेता अरुण शाह, कुशला डिमरी आदि प्रमुख थे।

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