मासिक धर्म की रूढ़िवादी प्रथा के दावों पर सुतोल ग्राम पंचायत ने जताई आपत्ति, मीडिया रिपोर्ट्स को किया ख़ारिज

चमोली –
चमोली जिले के दूरस्थ सुतोल गाँव में हाल ही में नदी में बहने से हुई एक 19 वर्षीय लड़की की मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस दुखद घटना के बाद कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और समाचार माध्यमों पर गाँव में मासिक धर्म (पीरियड्स) के दौरान महिलाओं को घरों में नहाने की अनुमति न होने जैसी कथित रूढ़िवादी प्रथाओं के दावे किए जा रहे थे। इन खबरों को भ्रामक और गलत बताते हुए सुतोल ग्राम पंचायत ने एक आवश्यक खुली बैठक बुलाई और एक निंदा प्रस्ताव पारित किया।बैठक में लिया गया कड़ा फैसलाग्राम प्रधान श्रीमती हंसा देवी की अध्यक्षता में हुई इस खुली बैठक में उपप्रधान, महिला मंगल दल की अध्यक्षा श्रीमती पुष्पा देवी, युवक मंगल दल के अध्यक्ष यशवंत सिंह समेत पूरे गाँव के गणमान्य लोग और ग्रामीण शामिल हुए। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर उन सभी फेसबुक पेजों, यूट्यूब चैनलों और समाचार पत्रों की कड़ी आलोचना की गई, जिन्होंने अपने व्यूज (Views) बढ़ाने के चक्कर में गाँव की छवि और सामाजिक व्यवस्था को नुकसान पहुँचाया है।ग्राम पंचायत ने स्थिति की साफ, कहा- कोई पाबंदी नहींप्रस्ताव में गाँव के वरिष्ठ नागरिकों और पंचायत प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा:घरों में नहाने की पूरी आजादी: ग्राम पंचायत सुतोल में ऐसी कोई भी रीति-व्यवस्था या नियम नहीं है जो महिलाओं को मासिक धर्म या किसी आपदा के समय घर में नहाने से रोकता हो।अनावश्यक पाबंदी का दावा गलत: किसी भी महिला को घरों में स्नान करने से रोकने की बात पूरी तरह से मनगढ़ंत है।व्यक्तिगत आस्था का मामला: व्यावहारिक रूप से अगर कोई महिला या परिवार अपनी व्यक्तिगत आस्था या पुरानी मान्यताओं के कारण स्वयं किसी अन्य स्थान या नदी किनारे स्नान के लिए जाता है, तो यह उसका निजी फैसला है। इसमें ग्राम पंचायत का कोई नियम या दोष नहीं है।सुविधा के अनुसार काम: आज के समय में गाँव की सभी महिलाएँ पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं और अपनी सुविधानुसार अपने घरों में ही स्नान करती हैं।बिना परिवार की अनुमति के वीडियो बनाने पर नाराजगीग्रामीणों ने इस बात पर गहरा रोष जताया कि कुछ बाहरी लोगों और असामाजिक तत्वों ने मृतका के परिवार, ग्राम पंचायत या स्थानीय समाज से सही जानकारी लिए बिना ही वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिए। पंचायत ने चेतावनी दी है कि इस तरह से गाँव की मान-हानि करने और झूठे नैरेटिव (तथ्य) दिखाने का काम तुरंत बंद किया जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस स्पष्टीकरण के बाद सभी लोग इस विषय पर अपनी नकारात्मकता को दूर करेंगे।बैठक के अंत में प्रेम सिंह, कुंवर सिंह, हरीश, दलबीर सिंह, उमराव सिंह, कमला देवी, कुंती देवी, मयूर देवी, मोहन सिंह, अमर सिंह समेत दर्जनों ग्रामीणों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर और अंगूठे का निशान लगाकर इस भ्रामक प्रचार का कड़ा विरोध दर्ज किया।


