जड़ी-बूटियों पर वैज्ञानिक शोध को मिलेगा नया आयाम, छात्रों के लिए बनेगा स्टडी मैटेरियल

-जड़ी-बूटी शोध संस्थान मंडल की समीक्षा बैठक में सीडीओ डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने दिए निर्देश
चमोली –
उत्तराखंड को हिमालयी जड़ी-बूटियों के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान मंडल गोपेश्वर ने बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। अब जड़ी-बूटियों के औषधीय और वैज्ञानिक शोध पर और अधिक जोर दिया जाएगा, साथ ही काश्तकारों को उनके वैज्ञानिक महत्व की जानकारी भी दी जाएगी।
जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान के निदेशक और मुख्य विकास अधिकारी चमोली डॉ. अभिषेक त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। बैठक में वैज्ञानिकों को निर्देश दिए गए कि संस्थान में शोध (Dissertation) के लिए आने वाले छात्रों हेतु स्टडी मैटेरियल तैयार किया जाए। उत्तराखंड में छात्रों को न केवल किताबी ज्ञान, बल्कि जमीनी स्तर पर जड़ी-बूटियों के उत्पादन की हकीकत दिखाने की जिम्मेदारी भी संस्थान की होगी।
डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि सिमली स्थित नर्सरी में औषधीय पौधा अपराजिता की पौध व्यापक स्तर पर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। जनपद में किसान जिस भी जड़ी-बूटी का उत्पादन कर रहे हैं, उसकी पूरी जानकारी एकत्र करने को कहा गया है।
– किसानों का डाटा बैंक बनाने और कृषक पंजीकरण पोर्टल को आईटीडीए से जोड़ने पर सहमति बनी है।
– उद्यान विभाग की नर्सरियों में कुछ जगह लेकर और सरकारी भूमि पर नई जड़ी-बूटी नर्सरी स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि किसानों को आवश्यकता के अनुसार पौध उपलब्ध हो सके।
*महिला समूह बनाएंगे नर्सरी, ब्लॉक स्तर पर मास्टर ट्रेनर तैनात*
आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से जड़ी-बूटी नर्सरी तैयार की जाएंगी। इसके लिए प्रत्येक मास्टर ट्रेनर को दो-दो महिला समूहों को प्रशिक्षण देकर नर्सरी स्थापना के लिए प्रोत्साहित करने का टास्क दिया गया है। साथ ही सभी मास्टर ट्रेनरों को अलग-अलग विकासखंड आवंटित कर जड़ी-बूटी संबंधी कार्यों को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अब होगी ब्रांडिंग*
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान के कार्यों की अब प्रोफेशनल ब्रांडिंग की जाएगी, ताकि जनपद के उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।


