उत्तराखंड

मां नंदा की बड़ी जात को सजा कुरुड़, 5 से कैलाश की ओर कूच

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तीन सितंबर से नंदा मेला,

-सात क्विंटल फूलों से सजा सिद्धपीठ;

-280 किमी की कठिन यात्रा में चौसिंग्या खाडू बनेगा मां नंदा का मार्गदर्शक

महावीर रावत ,नंदानगर

हिमालय की अधिष्ठात्री मां नंदा की 12 वर्ष में एक बार होने वाली बड़ी जात के लिए कुरुड़ सिद्धपीठ सजकर तैयार है। मां नंदा की कैलाश यात्रा पांच सितंबर को शुरू होगी। इससे पहले तीन सितंबर से कुरुड़ मंदिर में तीन दिवसीय नंदा मेले का शुभारंभ होगा। मंदिर परिसर को सात क्विंटल गेंदे के फूलों से सजाया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नंदानगर-रामणी मोटर मार्ग से मंदिर तक करीब 400 मीटर लंबे आस्था पथ का निर्माण भी पूरा कर लिया गया है।

पांच सितंबर को बंड, दशोली और राजराजेश्वरी क्षेत्र की नंदा डोलियां अपने-अपने पड़ावों से कैलाश के लिए रवाना होंगी। राजराजेश्वरी की डोली चरबंग, दशोली की कुमजुग और बंड क्षेत्र की डोली मैठाणा पहुंचेगी। यात्रा के अगले चरण में तीनों डोलियां 15 सितंबर को लाटू देवता मंदिर वाण पहुंचेंगी।

इंसेट।

आगे चलेगा मां नंदा का चौसिंग्या दूत

इस बार मां नंदा की कठिन हिमालयी यात्रा में सुंग गांव के भेड़ पालक रमेश सिंह बिष्ट का आठ माह का चौसिंग्या खाडू सबसे आगे चलेगा। चार सींगों वाले इस दुर्लभ मेढ़े को मां नंदा का शुभदूत और संदेशवाहक माना जाता है। बताया गया कि रमेश सिंह ने इसके जन्म के बाद ही इसे मां नंदा की जात के लिए समर्पित कर दिया था। पिछले तीन महीने तक यह लपथल बुग्याल में चरान पर रहा। 28 अगस्त को इसे सुंग गांव लाया गया। तीन सितंबर को गाजे-बाजे के साथ खाडू को कुरुड़ मंदिर पहुंचाया जाएगा। पांच सितंबर को मां नंदा की कैलाश विदाई के दौरान यही खाडू करीब 280 किलोमीटर लंबी दुर्गम यात्रा में डोली के आगे चलेगा।

होमकुंड से अकेला जाएगा कैलाश की ओर

यात्रा के दौरान श्रद्धालु खाडू की पीठ पर ओढ़ाए जाने वाले वस्त्र में मां नंदा के लिए श्रृंगार सामग्री, वस्त्र, स्थानीय पकवान और आभूषण बांधेंगे। मान्यता के अनुसार यात्रा के अंतिम पड़ाव होमकुंड पहुंचने के बाद खाडू को इन सामग्रियों के साथ अकेले कैलाश की ओर विदा किया जाता है।

पंजीकरण जरूरी नहीं, बीमार श्रद्धालु ऊंचाई पर न जाएं

बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल (सेनि.) हरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि जात में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं के पंजीकरण की बाध्यता नहीं है। लोग किसी भी पड़ाव से यात्रा में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपनी व्यवस्थाओं के साथ आने और जरूरी दवाइयां साथ रखने की अपील की। कमजोर और अस्वस्थ श्रद्धालुओं से उच्च हिमालयी क्षेत्र में न जाने और निचले क्षेत्रों में ही मां नंदा के दर्शन करने का आग्रह किया गया है।उन्होंने कहा कि मां नंदा की यह यात्रा किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि पूरे समाज की आस्था और परंपरा है। सभी देवी-देवताओं के सम्मान और स्थानीय रीति-रिवाजों का पालन करते हुए जात को संपन्न कराया जाएगा।

यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर समितियों का गठन कर दिया गया है। निर्जन और संवेदनशील पड़ावों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस और एसडीआरएफ संभालेगी। प्रशासन ने भी यात्रा को लेकर सुरक्षा एवं अन्य व्यवस्थाएं तेज कर दी हैं। खास बात: वर्ष 2014 में भी सुंग गांव के केदार सिंह बिष्ट का चौसिंग्या खाडू मां नंदा की जात में देवरथ बना था। इस बार फिर सुंग गांव से ही चौसिंग्या खाडू के मां नंदा की कैलाश यात्रा का मार्गदर्शक बनने से ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।

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