निहंग विवाद की जांच हरिद्वार भेजने पर चमोली जिला पंचायत नाराज
-ध्वनि मत से विरोध प्रस्ताव पारित, कर्णप्रयाग-नगरासू प्रकरण की जांच चमोली या रुद्रप्रयाग को सौंपने की मांग
जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवाल— उपद्रव और पथराव के बाद आरोपितों को बाइज्जत क्यों जाने दिया गया?
चमोली –
कर्णप्रयाग और नगरासू में निहंगों तथा स्थानीय लोगों के बीच हुए विवाद का मामला अब चमोली जिला पंचायत की बैठक में भी गूंजा। गुरुवार को आयोजित जिला पंचायत की बैठक में सदन ने ध्वनि मत से प्रस्ताव पारित कर कर्णप्रयाग-नगरासू प्रकरण की जांच हरिद्वार जनपद को सौंपे जाने का विरोध किया। साथ ही मांग की कि मामले की जांच चमोली अथवा रुद्रप्रयाग जिले को सौंपी जाए, ताकि स्थानीय परिस्थितियों और तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच हो सके।
बैठक के दौरान जिला पंचायत सदस्य सुरेश बिष्ट ने कहा कि सरकार इस गंभीर प्रकरण को हल्के में ले रही है। उन्होंने कहा कि कर्णप्रयाग और नगरासू की घटनाओं की जांच स्थानीय परिस्थितियों, प्रत्यक्ष तथ्यों और घटनास्थल की संवेदनशीलता को देखते हुए चमोली या रुद्रप्रयाग जिले में ही कराई जानी चाहिए। जांच हरिद्वार भेजे जाने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई।
सुरेश बिष्ट ने नगरासू प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि निहंगों द्वारा क्षेत्र में उत्पात मचाया गया, प्रशासन और पुलिस पर पथराव किया गया तथा कई दिनों तक क्षेत्र में भय और तनाव का माहौल बना रहा। इसके बावजूद संबंधित लोगों को बाइज्जत जाने दिए जाने पर उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम को लेकर उत्तराखंड की जनता सरकार से जवाब मांग रही है।
जिले की सबसे बड़ी जनप्रतिनिधि संस्था जिला पंचायत में मामला उठने के बाद सदन ने इसे गंभीर विषय मानते हुए ध्वनि मत से विरोध प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव में सरकार से मांग की गई कि कर्णप्रयाग एवं नगरासू निहंग विवाद प्रकरण की जांच हरिद्वार के बजाय चमोली अथवा रुद्रप्रयाग जिले को सौंपी जाए, ताकि मामले की निष्पक्ष, प्रभावी और तथ्यों पर आधारित जांच सुनिश्चित हो सके
जनता सरकार से पूछ रही है कि उपद्रव, पथराव और तनाव के बाद संबंधित लोगों को बाइज्जत क्यों जाने दिया गया। मामले की जांच स्थानीय जिले में होनी चाहिए **सुरेश बिष्ट, जिला पंचायत सदस्य**
**क्या है पूरा मामला**
* कर्णप्रयाग और नगरासू में निहंगों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद की घटनाएं सामने आई थीं।
* मामले में तनाव, उपद्रव और पथराव की घटनाओं के आरोप लगे।
* इस पूरे प्रकरण की जांच हरिद्वार जनपद को सौंपे जाने पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई है।
* चमोली जिला पंचायत ने अब ध्वनि मत से विरोध प्रस्ताव पारित कर जांच चमोली या रुद्रप्रयाग को सौंपने की मांग की है।



