पद्म भूषण चंडी प्रसाद भट्ट समेत 14 हस्तियां होंगी सम्मानित, मैती आंदोलन के प्रणेता पद्मश्री कल्याण सिंह रावत से हुई पहल की शुरुआत
विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित करेगा डायट चमोली

चमोली –
जनपद चमोली की माटी में जन्म लेकर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों के अनुभव, संघर्ष और उपलब्धियों को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) चमोली ने एक अभिनव पहल शुरू की है। संस्थान द्वारा कला, संस्कृति, संगीत, पर्यावरण, समाजसेवा, सरकारी सेवा, विज्ञान, शिक्षा और खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाली जनपद की 14 हस्तियों को सम्मानित करने के साथ ही व्याख्यानमाला का आयोजन किया जाएगा।
इस नवाचारी पहल का उद्देश्य केवल विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मान देना नहीं, बल्कि उनके जीवन-संघर्ष, अनुभव और कृतित्व को विद्यालयों के शिक्षकों एवं भावी शिक्षकों तक पहुंचाना है, ताकि नई पीढ़ी इन विभूतियों से प्रेरणा लेकर समाज और प्रदेश के विकास में अपनी भूमिका निभा सके। डायट में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान इसके लिए दो विशेष सत्र निर्धारित किए जा रहे हैं। इस पहल की पहली कड़ी में बुधवार को मैती आंदोलन के प्रणेता एवं पद्मश्री से सम्मानित पर्यावरणविद् कल्याण सिंह रावत को सम्मानित किया गया। डायट के प्राचार्य आकाश सारस्वत ने उन्हें अंगवस्त्र एवं शॉल ओढ़ाकर तथा पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया।
सम्मान समारोह के बाद पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने अपने जीवन की यात्रा और अनुभवों को प्रशिक्षुओं एवं शिक्षकों के साथ साझा किया। उन्होंने अपने छात्र जीवन से लेकर पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों तक की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने मैती आंदोलन की परिकल्पना, उसके उद्देश्य और समाज में इसके प्रभाव पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। श्री रावत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं और अभियानों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने भावी पीढ़ी को मैती कार्यक्रम से जोड़ने तथा इसके व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों में प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित कर ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।
पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने डायट प्राचार्य आकाश सारस्वत की इस नवाचारी पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले लोगों के अनुभव यदि विद्यार्थियों और शिक्षकों तक पहुंचें तो इससे शिक्षा को नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने कहा कि किताबों से मिलने वाले ज्ञान के साथ समाज के अनुभवी और कर्मशील लोगों के जीवन से मिलने वाली सीख भी विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
डायट के संकाय सदस्य डॉ. कमलेश मिश्रा ने बताया कि संस्थान ने जनपद की विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट पहचान बनाने वाली विभूतियों को सम्मानित करने और उन्हें व्याख्यान के लिए आमंत्रित करने की योजना बनाई है। प्रस्तावित सूची में पद्म भूषण चंडी प्रसाद भट्ट, किशन महिपाल, लखपत सिंह रावत, मुरली दीवान, नंदकिशोर हटवाल, विनोद रतूड़ी, नंदा सती, बसंती बिष्ट, पम्मी नवल, प्रो. मदन प्रसाद नगवाल, प्रो. आशुतोष सयाना, डॉ. राजेंद्र प्रसाद मैखुरी और दर्शन फर्स्वाण सहित अन्य विशिष्ट व्यक्तित्व शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि इन विभूतियों को संस्थान में आमंत्रित कर उनके जीवन, कार्यक्षेत्र और उपलब्धियों पर संवाद कराया जाएगा। इससे शिक्षक-प्रशिक्षुओं और शिक्षकों को अपने ही जनपद के प्रेरणादायी व्यक्तित्वों को नजदीक से जानने और उनके अनुभवों से सीखने का अवसर मिलेगा।कार्यक्रम में डायट के वरिष्ठ संकाय सदस्य राजेंद्र प्रसाद मैखुरी, वीरेंद्र सिंह कठैत, रविंद्र सिंह बर्त्वाल, योगेंद्र सिंह बर्त्वाल, डॉ. गजपाल राज, सुबोध कुमार डिमरी, गोपाल प्रसाद कपरुवाण सहित जनपद के विभिन्न विद्यालयों के 100 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा डीएलएड प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर के प्रशिक्षु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन संकाय सदस्य डॉ. कमलेश कुमार मिश्र ने किया।


