स्थायी राजधानी की मांग को लेकर गैरसैंण पहुंची पैदल यात्रा
विभिन्न दलों के लोगों ने भी दिया समर्थन

पूर्व आईएएस विनोद रतूड़ी ने एसडीएम कर्णप्रयाग के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजा प्रार्थना पत्र*
गैरसैण( चमोली )-
उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाए जाने की मांग को लेकर पूर्व आईएएस अधिकारी विनोद रतूड़ी के नेतृत्व में निकली ‘गैरसैंण स्थायी राजधानी बनाओ’ पैदल यात्रा गैरसैंण पहुंची। यात्रा के दौरान स्थायी राजधानी के मुद्दे को लेकर जनसमर्थन जुटाया गया। इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों और विचारधाराओं से जुड़े लोगों ने भी यात्रा को अपना समर्थन दिया।
गैरसैंण पहुंचने के बाद पूर्व आईएएस विनोद रतूड़ी ने उप जिलाधिकारी कर्णप्रयाग अखिलेश नौडियाल के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम प्रार्थना पत्र प्रेषित किया। प्रार्थना पत्र में उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाए जाने की मांग उठाई गई है। इस मौके पर रतूड़ी ने कहा कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने की मांग लंबे समय से चली आ रही है। पैदल यात्रा का उद्देश्य इस मांग को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही सरकार का ध्यान आकर्षित करना है। उन्होंने कहा कि गैरसैंण उत्तराखंड की पर्वतीय भावनाओं और राज्य आंदोलन की अवधारणा से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। यात्रा में शामिल लोगों ने कहा कि राज्य गठन के बाद से ही स्थायी राजधानी को लेकर बहस जारी है। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर समय-समय पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की ओर से आंदोलन किए जाते रहे हैं। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर सरकार को गंभीरता से विचार कर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
रतूड़ी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का गठन 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर हुआ था। इस राज्य का निर्माण पहाड़ी क्षेत्र में हुए एक ऐतिहासिक जन आंदोलन का परिणाम था, जिसमें 42 लोगों ने एक अलग पहाड़ी राज्य की मांग करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी, उत्तराखंड के गठन के बाद से देहरादून इसकी अस्थायी राजधानी के रूप में कार्य कर रहा है। हालांकि, राज्य स्थापना आंदोलन के दौरान, पहाड़ी क्षेत्र के लोगों ने गरसैंण को राज्य की स्थायी राजधानी घोषित करने की पुरजोर मांग की, क्योंकि यह भौगोलिक रूप से मध्य पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है और राज्य के गठन के लिए संघर्ष करने वाले लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
राज्य के गठन के दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, स्थायी राजधानी घोषित करने का मुद्दा अभी भी अनसुलझा है। उत्तराखंड की जनता समय-समय पर राज्य सरकार को गैरसैंण से जुड़ी अपनी आकांक्षाओं की याद दिलाती रही है, लेकिन अभी तक कोई निर्णायक निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन 21 सितंबर 2025 को दिल्ली के जंतर मंतर से शुरू हुआ और इस मुद्दे के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में जारी है। नगर पंचायत अध्यक्ष मोहन भंडारी ने कहा कि राजधानी गैरसैंण के मुद्दे को राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर जनभावना के रूप में देखा जाना चाहिए।
यूकेडी के यूथ विंग के कमांडर आशीष नेगी ने कहा कि गैरसैंण राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों के विकास और पहाड़ की मूलभूत समस्याओं से जुड़े सवालों का केंद्र बन सकता है। उन्होंने सरकार से स्थायी राजधानी के मुद्दे पर ठोस निर्णय लेने की मांग की। इस दौरान रमेश थपलियाल, रामेश्वर प्रसाद, गोपाल दत्त कुमेड़ी, दान सिंह मिंगवाल, सुधीर गैरोला, डीपी थपलियाल, प्रभा राणा, बलबीर धरमाण, दान सिंह बिष्ट, रमेश दत्त नौटियाल, कमल किशोर डिमरी, भुवन कठायत, मंजू गड़िया, सोनी बोरा, पूजा शर्मा, मोहन भंडारी, सुरेंद्र बिष्ट, अशोक साह, आशीष नेगी, वीरेंद्र लाल, पीसी तिवारी, प्रकाश जोशी, जगदीश ममगाई सहित कई लोग मौजूद रहे।


